मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी के रूह-ए-रवाँ मुफ़्ती रहमतुल्लाह क़ासमी साहब की कोशिशों से उक्त शैक्षणिक एवं धार्मिक संस्थान में मज़हबी व दीनी तालीमी सरगर्मियाँ लगातार जारी हैं। इसी के पेशे-नज़र दीनी तालीम के फ़रोग़, मु’अल्लिमीन की तरबियत और नई नस्ल की सही दीनी रहनुमाई के मक़सद से दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ज़िला बुरहानपुर के ज़ेरे-एहतिमाम शनिवार, 8 अगस्त 2026 को एक रोज़ा तरबियती वर्कशॉप बराए मु’अल्लिमीन का आयोजन किया जा रहा है।
यह अहम प्रोग्राम दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी, बुरहानपुर में हज़रत मुफ़्ती रहमतुल्लाह क़ासमी साहब, नायब सदर दीनी तालीमी बोर्ड, मध्य प्रदेश की सरपरस्ती में सुबह 9:45 बजे से असर की नमाज़ तक, यानी शाम करीब 5:00 बजे तक, आयोजित होगा।
दारुल उलूम शेख अली मुत्तकी, बुरहानपुर के मोहतमिम हाफ़िज़ मुहम्मद ज़ुबैर साहब से मिली जानकारी के मुताबिक़, मौजूदा दौर में उम्मत-ए-मुस्लिमा को मुख़्तलिफ़ फ़िक्री, अख़लाक़ी और तालीमी चुनौतियों का सामना है। ऐसे हालात में नई नस्ल के ईमान, अक़ायद, इबादात, इस्लामी पहचान और बेहतरीन किरदार की हिफ़ाज़त के लिए मु’अल्लिमीन का किरदार निहायत अहम क़रार दिया गया है।
इसी मक़सद के तहत इस वर्कशॉप में मु’अल्लिमीन की दीनी, तरबियती और तदरीसी सलाहियतों को और अधिक मोअस्सिर बनाने पर ख़ुसूसी तवज्जोह दी जाएगी, ताकि वे जदीद तक़ाज़ों के मुताबिक़ अपनी ज़िम्मेदारियाँ बेहतर अंदाज़ में अदा कर सकें।
वर्कशॉप की सदारत हज़रत मौलाना मुफ़्ती अबुल कलाम साहब दामत बरकातुहुम, सूबाई सदर दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, मध्य प्रदेश एवं नाज़िम जामिया अबू तल्हा, भोपाल फ़रमाएँगे। जबकि इस प्रोग्राम में हज़रत मौलाना फ़िरोज़ आलम साहब दामत बरकातुहुम, ऑल इंडिया ट्रेनर व मरकज़ी मुआविन, दीनी तालीमी बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद तथा नाज़िम मयार-ए-मकतब, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, ख़ुसूसी ट्रेनर के तौर पर शिरकत करेंगे।
मुन्तज़िमीन ने ज़िले भर के तमाम दीनी मकातिब के मु’अल्लिमीन व मु’अल्लिमात से इस तरबियती प्रोग्राम में भरपूर शिरकत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस वर्कशॉप से हासिल होने वाली रहनुमाई और तजुर्बात तदरीसी निज़ाम को और मज़बूत बनाने तथा नई नस्ल की दीनी व अख़लाक़ी तरबियत में मुआविन साबित होंगे।
वर्कशॉप के आयोजन को दीनी तालीम के इस्तेहकाम, मयारी तदरीस के फ़रोग़ तथा मु’अल्लिमीन की पेशावराना व अख़लाक़ी तरबियत की जानिब एक अहम और मुस्बत क़दम क़रार दिया जा रहा है।
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