अहमद रज़ा, चुनार/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

कर्बला के शहीदों की याद में मुहर्रम के चालीसवें दिन निकलने वाला पारंपरिक जुलूस-ए-चेहलुम शोहदा-ए-कर्बला इस वर्ष भी पूरे एहतराम और अकीदत के साथ निकाला गया। हर वर्ष की तरह इस बार भी जुलूस अज़ाखाना इमामबाड़ा, चुनार से शुरू होकर अपने पारंपरिक मार्गों से गुजरते हुए गोल बाज़ार, दीपबहार चौक और शहर के प्रमुख मार्गों से निकला। अंत में जुलूस पुनः अज़ाखाना इमामबाड़ा पहुंचकर संपन्न हुआ।

जुलूस में हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) के मुबारक घोड़े ज़ुलजनाह की शबीह निकाली गई। इसके साथ ही कर्बला के छह माह के मासूम शहीद हज़रत अली असग़र (अ.स.) की याद में अकीदत भरा झूला और अमारी भी शामिल रही। इन प्रतीकों को देखकर अज़ादार गमगीन हो गए और पूरे रास्ते “या हुसैन” की सदाएं गूंजती रहीं।
इस अवसर पर उलेमा और वक्ताओं ने हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) तथा उनके 72 वफ़ादार साथियों की बेमिसाल कुर्बानी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने हक़, सच्चाई, इंसानियत और इंसाफ़ की रक्षा के लिए अपने परिवार सहित सर्वोच्च बलिदान दिया।
जुलूस को शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने में स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल का सराहनीय सहयोग रहा।

