मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:
अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन एवं राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, नगर के संयुक्त तत्वावधान में आयुर्वेद के महान चिकित्सक एवं शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत की जयंती के अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय परिसर स्थित इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के सभागार में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में आचार्य सुश्रुत के जीवन, चिकित्सा दर्शन तथा आयुर्वेद एवं शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुर्वेद महासम्मेलन के जिलाध्यक्ष एवं इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के जिला सचिव डॉ. विजय जोहरी ने की। उन्होंने कहा कि आचार्य सुश्रुत जयंती मनाने का उद्देश्य केवल उनकी जयंती का स्मरण करना नहीं, बल्कि आयुर्वेद की समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा का सम्मान करना, चिकित्सा जगत को उनके आदर्शों से प्रेरित करना तथा नई पीढ़ी को भारतीय चिकित्सा पद्धति की गौरवशाली विरासत से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर देशभर में विचार गोष्ठियों, व्याख्यानों एवं जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से आयुर्वेद के वैज्ञानिक स्वरूप को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
मुख्य अतिथि एवं राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, नगर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश कुमार ने कहा कि आचार्य सुश्रुत ने अपनी महान कृति ‘सुश्रुत संहिता’ के माध्यम से शल्य चिकित्सा को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया। इस ग्रंथ में लगभग 300 प्रकार की शल्य क्रियाओं तथा 120 से अधिक शल्य उपकरणों का विस्तृत वर्णन मिलता है। उन्होंने नाक के पुनर्निर्माण (राइनोप्लास्टी), मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा, अस्थिभंग के उपचार, घावों की देखभाल तथा अनेक जटिल शल्य विधियों का वर्णन किया, जो अपने समय से कहीं आगे की चिकित्सा उपलब्धियां थीं।
जिला चिकित्सालय आयुष विभाग के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आचार्य सुश्रुत केवल महान शल्य चिकित्सक ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट शिक्षक, उपदेशक एवं शोधकर्ता भी थे। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुशासन, स्वच्छता तथा रोगी के प्रति संवेदनशील व्यवहार को विशेष महत्व दिया, जो आज भी चिकित्सा जगत के लिए प्रेरणास्रोत है।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की महिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. आचल गुप्ता ने कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवन जीने की संपूर्ण वैज्ञानिक जीवनशैली है। आचार्य सुश्रुत के सिद्धांत आज भी समाज को निरोग, स्वस्थ एवं जागरूक बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
गोष्ठी में उपस्थित चिकित्सकों एवं आयुर्वेद प्रेमियों ने आचार्य सुश्रुत के आदर्शों का अनुसरण करते हुए आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार तथा जन-जन तक इसकी उपयोगिता पहुंचाने का संकल्प लिया। अंत में डॉ. आचल गुप्ता ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. विजय जोहरी, डॉ. मुकेश कुमार, डॉ. राजेंद्र कुशवाहा, डॉ. आचल गुप्ता, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ददरौल के बीपीएम फज़लू, गजेन्द्र सिंह, अमनदीप सक्सेना, दुर्गेश गुप्ता सहित अनेक चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

