मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
शहर-ए-अज़ीज़ बुरहानपुर के व्यंग्य और हास्य के मशहूर शायर आलम नश्तरी (उम्र 63 वर्ष) का सोमवार की सुबह फज्र की नमाज़ के समय इंतेक़ाल हो गया। उनके निधन से साहित्यिक जगत, विशेषकर शायरी से जुड़े लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है।
मरहूम का पूरा नाम सैयद आलम अली पुत्र मरहूम अब्दुर्रशीद था, लेकिन साहित्यिक दुनिया में वे अपने उस्ताद शायर नश्तर शफ़क़ी के शागिर्द होने के कारण “आलम नश्तरी” के नाम से प्रसिद्ध हुए। वे पिछले करीब दो दशकों से शायरी से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और व्यंग्य–हास्य की विधा के माध्यम से उन्होंने विशेष पहचान बनाई थी।
मरहूम आलम नश्तरी ने अपने उस्ताद नश्तर शफ़क़ी के काव्य-संग्रह को अपने निजी खर्च से प्रकाशित कराया था, साथ ही उसके विमोचन के अवसर पर एक भव्य अखिल भारतीय मुशायरे का भी आयोजन किया था। वे पिछले चार महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे और मधुमेह (शुगर) की बीमारी से पीड़ित थे।
मरहूम के परिवार में पत्नी के अलावा पुत्र शामिल हैं—हाफ़िज़ अब्दुर्राज़िक़, हाफ़िज़ मोहम्मद शाहिद अली, हाफ़िज़ मोहम्मद रईस अली (तीनों हाफ़िज़-ए-क़ुरआन), एक पुत्र डॉ. हैदर अली (B.U.M.S.), तथा एक पुत्र नदीम अली, जो फर्नीचर कारीगर हैं। परिजनों ने उनकी बीमारी के दौरान पूरी निष्ठा और सेवा भाव से देखभाल की।
मरहूम का जनाज़ा ज़ुहर की नमाज़ के समय उनके पैतृक निवास क़िला गली से उठाया गया और हज़रत इब्राहीम शाह क़ब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। नमाज़-ए-जनाज़ा उनके पुत्र हाफ़िज़ अब्दुर्राज़िक़ ने अदा कराई। जनाज़े में बड़ी संख्या में राजनीतिक, सामाजिक और साहित्यिक हस्तियों ने शिरकत की, जिनमें शाही जामा मस्जिद के मुतवल्ली हज़रत सैयद मोहम्मद अनवारुल्लाह शाह बुख़ारी प्रमुख रूप से शामिल रहे।
दुआ है कि अल्लाह तआला मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला से आला मक़ाम अता करे और उनके परिजनों को सब्र-ए-जमील प्रदान करे। आमीन।

