जुबिली वर्ष 2025 की भावना के साथ कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में क्रिसमस की व्यापक आध्यात्मिक तैयारियाँ | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

जुबिली वर्ष 2025 की भावना के साथ कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में क्रिसमस की व्यापक आध्यात्मिक तैयारियाँ | New India Times

कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव क्रिसमस 2025 की तैयारियाँ इस वर्ष विशेष आध्यात्मिक महत्व के साथ की जा रही हैं। यह वर्ष पोप फ्रांसिस द्वारा घोषित जुबिली वर्ष 2025 है, जिसका विषय है — “आशा के तीर्थयात्री”।

जुबिली वर्ष 2025 की भावना के साथ कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में क्रिसमस की व्यापक आध्यात्मिक तैयारियाँ | New India Times

क्रिसमस वह पवित्र अवसर है जब ईश्वर ने एक विनम्र बालक के रूप में मानव इतिहास में प्रवेश कर समस्त मानवता के लिए आशा, मुक्ति और नया जीवन प्रदान किया। जुबिली वर्ष के प्रकाश में बेथलेहेम की चरनी को पहले पवित्र द्वार के रूप में देखा जाता है, जहाँ से ईश्वर की दया और प्रेम संसार में प्रकट हुआ। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए झाबुआ धर्मप्रांत की सभी पल्लियों, मिशन स्टेशनों, संस्थाओं और धार्मिक समुदायों में क्रिसमस की व्यापक तैयारियाँ की जा रही हैं।

जुबिली वर्ष 2025 की भावना के साथ कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में क्रिसमस की व्यापक आध्यात्मिक तैयारियाँ | New India Times

धर्मप्रांत की सभी पल्लियों में चरनी निर्माण के माध्यम से विश्वासियों, विशेषकर बच्चों और युवाओं को अवतार के रहस्य से जोड़ा जा रहा है। ये चरनियाँ केवल सजावट नहीं, बल्कि विनम्रता, सादगी और ईश्वर की निकटता का जीवंत संदेश हैं, जो यह सिखाती हैं कि ईश्वर सबसे पहले हमारे हृदय में जन्म लेना चाहते हैं।

जुबिली वर्ष 2025 की भावना के साथ कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ में क्रिसमस की व्यापक आध्यात्मिक तैयारियाँ | New India Times

क्रिसमस के पूर्व दिनों में कैरोल गायन के माध्यम से विश्वासी घर-घर जाकर शांति, प्रेम, क्षमा और आशा का संदेश पहुँचा रहे हैं। जुबिली वर्ष में ये कैरोल आशा की घोषणाएँ बन जाती हैं, जो समाज में भाईचारे, मेल-मिलाप और आपसी सम्मान को प्रोत्साहित करती हैं। यह कैरोल गायन एक प्रकार की आध्यात्मिक तीर्थयात्रा है, जिसमें विश्वासी मसीह को लेकर समाज के बीच जाते हैं।

इस दौरान झाबुआ धर्मप्रांत में आध्यात्मिक नवीनीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। सभी पल्लियों में विशेष प्रार्थनाएँ और आराधनाएँ, वचन-चिंतन एवं आध्यात्मिक प्रवचन, उपवास, आत्मसंयम और प्रायश्चित, पापस्वीकार तथा पवित्र संस्कारों की तैयारी के माध्यम से विश्वासियों को आमंत्रित किया जा रहा है कि वे बाहरी उत्सव से पहले अपने हृदयों को प्रभु के आगमन के लिए तैयार करें।

इस अवसर पर कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ के धर्माध्यक्ष पीटर खाराड़ी ने अपने संदेश में कहा,
“जुबिली वर्ष में मनाया जाने वाला यह क्रिसमस हमें स्मरण कराता है कि सच्ची आशा का स्रोत स्वयं मसीह हैं। चरनी, प्रार्थना, उपवास और कैरोलों के माध्यम से हम अपने जीवन का नवीनीकरण करें और ‘आशा के तीर्थयात्री’ बनकर अपने परिवारों, समाज और राष्ट्र में शांति, प्रेम और क्षमा के साक्षी बनें।”

वहीं धर्मप्रांत के मीडिया प्रभारी फादर मनीष डामोर ने कहा,
“कैथोलिक धर्मप्रांत झाबुआ इस पावन अवसर पर सभी विश्वासियों एवं सद्भावना रखने वाले लोगों से आग्रह करता है कि वे क्रिसमस को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और जिम्मेदारी के अवसर के रूप में मनाएँ, विशेषकर गरीबों, बीमारों, अकेलों और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशील बनें।”

प्रार्थना है कि जुबिली वर्ष 2025 में मनाया जाने वाला यह क्रिसमस हर घर में आशा, हर परिवार में एकता और हर हृदय में मसीह की शांति भर दे।
उक्त जानकारी कैथोलिक डायोसिस झाबुआ के मीडिया प्रभारी फादर मनीष डामोर द्वारा दी गई।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.