नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मतदान और वोटो की गिनती के बीच का चंद घंटों का अंतर ताकतवर पार्टियों को परेशान कर रहा है। चुनाव आयोग ने वोटिंग के एक दिन पहले तक प्रचार करने की छूट दे दी है जिसका लाभ विपक्षी दलों को कितना होगा पता नहीं। चुनाव में सभी दलों के लिए बराबरी की ज़मीन ख़त्म कर दी गई है। सरकार की योजनाओं से मिलने वाली नोट ने वोट की चोट का असर बेअसर कर दिया है। सूरत लोकसभा सीट से शुरू हुए बीजेपी के निर्विरोध पैटर्न से असहमति का अधिकार गंवा रही जनता में धीरे-धीरे लोकतंत्र की समझ बढ़ती जा रही है।

महाराष्ट्र बीजेपी के सबसे सीनियर नेता गिरीश महाजन के गृह नगर जामनेर में कांग्रेस और NCP(SP) स्वतंत्र रूप से आपस में लड़ते हुए बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ने का प्रयास कर रहे है। अकार्यक्षम नेताओं के कारण अस्तित्व के लिए लड़ रही कांग्रेस को वोटर अपनी खुद के वोटर होने की अस्मिता के लिए जिंदा रखने के मूड में है। प्रगतिशील समाजवादी विचारो के बुनियाद पर खड़ी एनसीपी शरदचंद्र पवार का बहुजन समाज में अपना आधार है। 17 में से 06 सदस्य मुस्लिम इलाके से चुने जाने हैं।

बचे 11 में 05 पर कड़ी टक्कर है। लोग चाहते हैं कि नगर परिषद में उनकी आवाज़ सुनाई दे। वोटर्स ने मन बना लिया तो जामनेर नगर परिषद के चुनाव नतीजे से एक ऐसा युवा नेतृत्व जन्म लेगा जो 1995 में लिखे गए इतिहास को 2029 में 35 साल बाद नए सिरे से लिखेगा। जलगांव जिले में भुसावल चालीसगांव पाचोरा मुक्ताई नगर वरणगांव पारोला अमलनेर चोपड़ा के नतीजों पर उत्तर महाराष्ट्र की निगाहे है। पूर्व मंत्री सुरेश जैन ने राजनीति में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया है। एकनाथ खडसे और सुरेश जैन की साझा भूमिका बीजेपी को जिला परिषद की सत्ता में वापसी के लिए बड़ी परेशानी खड़ी करेगी।

