रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

मेघनगर स्थित सेंट अर्नाल्ड चर्च में दिव्य संघ समाज (SVD) ने सेवा और समर्पण की अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपनी स्थापना के 150 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव बड़े ही आदर, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। यह ऐतिहासिक अवसर न केवल दिव्य संघ समाज के समर्पित कार्यों का प्रतीक बना, बल्कि यह ईश्वर की कृपा और विश्वास की यात्रा का भी उत्सव बन गया।

समारोह का शुभारंभ प्रार्थना और आराधना से हुआ, जिसके पश्चात् फादर काश्मीर डामोर ने अपने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों का अभिनंदन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में धर्मगुरु, श्रद्धालु, विद्यार्थी, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनकर गर्व अनुभव किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भोपाल महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष दुरैराज SVD उपस्थित रहे। उनके साथ सेवानिवृत्त महाधर्माध्यक्ष लियो कार्नेलियो SVD, इंदौर धर्मप्रांत के सेवानिवृत्त धर्माध्यक्ष चाको थोट्टूमारीकल SVD, झाबुआ धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष पीटर खराड़ी, दिव्य संघ समाज के प्रोविंशियल फादर पॉल राज, तथा झाबुआ धर्मप्रांत के विकार जनरल फादर थॉमस पी. ए. मंच पर उपस्थित रहे। सभी अतिथियों की उपस्थिति ने समारोह को एक विशेष गरिमा और आध्यात्मिकता प्रदान की।

अपने उद्बोधनों में सभी वक्ताओं ने दिव्य संघ समाज द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और मानवीय उत्थान के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदानों को स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि 150 वर्षों की यह यात्रा केवल संस्थान की नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग और निरंतर सेवा की मिसाल है।
धर्माध्यक्ष चाको SVD ने कहा, “दिव्य संघ समाज ने सदैव मानवता की सेवा को अपना धर्म माना है। शिक्षा और सेवा के माध्यम से इस समाज ने अनेक जीवनों में प्रकाश फैलाया है। यह जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि ईश्वर की योजना में हमारे सहयोग का स्मरण है।”
धर्माध्यक्ष पीटर खराड़ी ने झाबुआ क्षेत्र में दिव्य संघ समाज द्वारा दी जा रही सेवाओं की सराहना करते हुए कहा, “यह संगठन न केवल लोगों के जीवन को बदलने का कार्य कर रहा है, बल्कि समाज को प्रेम, एकता और शांति की ओर अग्रसर कर रहा है।”
कार्यक्रम के समापन पर फादर केजेटन डिमेलो ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा, “हमारी यह यात्रा केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि भविष्य की नई प्रेरणा है — एक ऐसा भविष्य जिसमें सेवा और विश्वास का मार्ग और भी दृढ़ होगा।”
यह आयोजन वास्तव में दिव्य संघ समाज की 150 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा का उत्सव था — एक ऐसी यात्रा जिसने समाज को न केवल शिक्षा, स्वास्थ्य और सेवा के माध्यम से ऊंचाइयों तक पहुंचाया, बल्कि मानवता और ईश्वर के प्रेम का सजीव साक्ष्य भी प्रस्तुत किया। यह समारोह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा, आस्था और सेवा भावना का सजीव उदाहरण बन गया।

