मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव विधानसभा आदिवासी अंचल में लगातार जहां रोजगार और पलायन का मुद्दा हमेशा ही सुर्खियों में रहता है जिसके लिए कोई पहल नहीं की जा रही है आलम यह है कि भोपाल इंदौर पीतमपुर सहित कई अन्य बड़े-बड़े औद्योगिक क्षेत्र में जुन्नारदेव विधानसभा के मजदूर वर्ग के लोग इस जगह अपना जीवन यापन कर रहे हैं क्षेत्र में अगर रोजगार मिले तो पलायन रुक सकता है चुनाव के समय कांग्रेस भाजपा द्वारा रोजगार देने का आश्वासन और खदान खोलने की बात कही गई थी। जो सिर्फ आश्वासन पर ही टिकी हुई है खदानें आखिर कब खुलेगा आज भी ख्वाब है।क्षेत्र में अन्य रोजगार के संसाधन बड़े स्तर पर मौजूद नहीं है।
वही एक ट्रेन स्टॉपेज हो जाने से कांग्रेस भाजपा अपने आप में ही श्रेय लेने को मजबूर है जनता द्वारा लगातार किया गया संघर्ष भी दिखाई नहीं देता। रोजगार खोलने के लिए श्रेय की राजनीति नहीं की जा रही। कोयलांचल की चमक वापस लाने के लिए लगातार यहां मांग है। व्यापार की स्थिति लगातार ठप होती चली जा रही है मार्केट सुनसान नजर आते हैं अभी तक खदानें खुलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे। आखिर इस आदिवासी अंचल के लोगों को कब तक पलायन करना पड़ेगा और रोजगार के लिए और कितना संघर्ष करना पड़ेगा आज भी यह सवाल बना हुआ है जिसके गुत्थी सुलझाने का नाम ही नहीं ले रही। चुनाव में किए गए वादे चुनाव तक ही सीमित नजर आते हैं संबंधित जिम्मेदारों से मुलाकात के बाद फिर मांग पत्र दिया जाता है जिससे कुछ दिनों तक उम्मीद जगाने के बाद चकनाचूर हो जाती है।

