संदीप शुक्ला, ग्वालियर (मप्र), NIT; 
शहर में कला-संस्कृति के केंद्र “कला वीथिका” पर कोई कब्ज़ा नहीं होने दिया जाएगा….किसी का भी नहीं। ये हमारी धरोहर है और पूरा शहर इसके हक़ में खड़ा है।
आज कला वीथिका पर शहर भर के तमाम लोगों ने समवेत स्वर में यह निश्चय किया कि यहां स्मार्ट सिटी का “कमांड कंट्रोल रूम” नहीं बनाने दिया जाएगा। इसके एवज में न कोई वैकल्पिक जगह चाहिए न दूसरा भवन।
इस बैठक में बताया गया कि ‘मध्य भारत’ राज्य के समय सन 1955 में देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने “कला-वीथिका” का उदघाटन किया था।
यहां तानसेन समारोह से लेकर राज्य नाट्य समारोह तक आयोजित होते रहे हैं। पं. जसराज के गायन से लेकर प्रो नामवर सिंह ,प्रभाष जोशी तक के भाषण हुए हैं। रुद्र हांजी और विमल कुमार जैसों की कलाओं का केंद्र रहा है।
एल एस राजपूत, एस के शिंदे जैसे चित्रकारों ने यहां बैठ कर कला साधना की।ब.ब. कारंत जैसे ख्यात निर्देशकों के नाटक हुए।
ऐसी बहुमूल्य इमारत को सरकारी कामकाज के लिए किसी हाल में अधिग्रहीत नहीं करने दिया जाएगा।
सर्वसम्मति से यह तय हुआ कि यदि प्रशासन ऐसी कोई कोशिश करता है तो लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध किया जाएगा। धरना, अनशन और मानव श्रंखला बना कर कला वीथिका की हिफाज़त की जाएगी।
यह भी निश्चय किया गया कि प्रशासन को कोई ज्ञापन नहीं दिया जायेगा क्योंकि यह शहर की धरोहर है और उसके लिए शहर कोई याचना नहीं करेगा।
नागरिकों की इस बैठक में साहित्यकार, कलाकार, रंगकर्मी, पत्रकार सभी वर्गों के लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे।
