मोहम्मद सिराज, ब्यूरो चीफ, पांढुर्णा (मप्र), NIT:

मुबंई और पांढुरना में कंपनी कार्यों में व्यस्त रहने के बावजूद, गरीब, पिछड़े तथा आर्थिक रूप से वंचित बच्चों के लिये शाह परिवार का दिल धड़कता है, इन बच्चों से भावनात्मक लगाव होने से ड्रायटेक प्रोसेसेस प्रायवेट लिमिटेड गढखापा पांढुरना के शाह परिवार ने शास. हाईस्कूल सावरगाव पांढुरना को स्मार्ट स्कूल बनाने में सहयोग किया। शाला में 75 इंच, स्मार्ट इन्टरेक्टिव टच पैनल ऑल इन वन कम्पयूटर तथा 12 सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाकर गरीब तथा आदिवासी बहुलता के 85% गरीबी रेखा के नीचे के बच्चों की स्कूल को सहयोग किया। शिक्षकों तथा छात्रों ने इतने अधिक फक्शन के स्मार्ट बोर्ड को जीवन में प्रथम बार देखा तथा बहुआयामी उपयोगिता देखकर बच्चों की आंखे खुशी से नम हुयी, बच्चों ने कहां मॅडम हम अब छुट्टियों में स्कूल पढ़ने आयेंगे।
जो बच्चे शाला नहीं आते थे, बच्चों के पालकों से लगातार संपर्क करना पड़ता था, उनके मन मे पढ़ने और सिखने की भावना उत्पन्न हुयी, यह बदलाव देखकर सभी आश्चर्यचकित होकर खुश हुये। कंपनी से आये इंजिनियर ने जब स्मार्ट इन्टरेक्टिव बोर्ड को उपयोग करने का प्रशिक्षण शिक्षकों तथा छात्रों को दिया, और कहॉ कि, कंपनी से इंजिनियर आकर आप सबको दो दिन का प्रशिक्षण देंगे। कंपनी ने देश के लगभग 2500 पुरूष, महीलाओ को रोजगार देकर उनके परीवारों की जिम्मेदारी लेकर पांढुरना क्षेत्र के साथ-साथ एशिया खण्ड में सर्वोत्तम स्थान प्राप्त किया है, इस कंपनी में विदशी इंजिनियर भी काम करते देखे गये है, फलस्वरूप इस कंपनी पर पांढुरना वासी गौरव महसुस करते है।
छुट्टीयों में भी लगेगी शाला: अब शाला छुट्टियों में भी लगाकर पढ़ाई के साथ-साथ कम्प्यूटर का भी प्रशिक्षण दिया जायेगा। प्राचार्य व्दारा ग्रामों में जाकर रात्रि चौपाल लगाकर बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने अभिभावकों को प्रेरित किया गया था, परन्तु वर्तमान में स्मार्ट क्लास होने से छात्रों का लगाव स्कूल के प्रति बढ़ रहा है।
स्मार्ट क्लास से बच्चों के ज्ञान के स्तर में बढ़ोतरी होगी: स्मार्ट क्लास के तहत पढ़ने और पढ़ाने में तकनीकी के इस्तेमाल से बच्चों के ज्ञान के स्तर में वृघ्दि होगी, किसी भी विषय को समझने में नई तकनीकी स्मार्ट क्लास से मिलेगी, चॉक की डस्ट नही होगी, छात्र किसी कारण अनुपस्थित रहने पर, पढ़ाये गये अध्याय की पीडीएफ फाईल व्हाटसऐप के माध्यम से कक्षा के ग्रुप में डालकर दी जायेगी, इससे कॉपियों की बचत होगी, बस्तों का बोझ कम होगा। पढ़ाई को मज़ेदार और रोचक बनाती है स्मार्ट क्लास। याद होगा फटाफट, रिजल्ट आयेगा शत-प्रतिशत । नवाचार से बच्चों में परिवर्तन आ रहा है, स्कूल 21 वीं सदी में कौशल की ओर सबके सहयोग से बढ़ रहा है।
सी.सी.टी.वी. कैमरे से बदलाव: कैमरे से शाला परीसर की सुरक्षा होगी, शिक्षको तथा छात्रों के शाला आने, जाने, पढ़ने, पढ़ाने का आडियो, विडियो टेप होगा, अधिकारीगण अपने कार्यालय से शाला पर निगरानी रखेगे, पालक बच्चों को घर पर बैठकर शाला में पढ़ते हुये देखकर आनंदित होंगे।
शिक्षा दान से बड़ा पुण्य का कार्य कोई नहीं है: सिमित संसाधन की इस शाला में झाडु, पोछा से लेकर अन्य सभी कार्य प्राचार्य करके खुशी महसूस करती है, शाला में सामग्री दान देने हेतु प्रेरित करती है, जिससे शाला को स्मार्ट बनाने हेतु नगरवासी बढ़चढ कर भाग ले रहे है, शाला देखने आते हैं, उन्हें जो कमी दिखी उसे स्वेचछा से अपने सामर्थ्य के अनुसार, अपने पुर्वजों के स्मृति में, पगडीरस्म में, जन्म दिवस पर, विवाह के सालगिराह पर शाला उपयोगी सामग्री देते है, जिसे शाला के स्टॉक रजिस्टर तथा बोर्ड पर लिखा जाता है, दान रूपयों के रूप में स्विकार नही किया जाता। सबके सहयोग से उन्नती की ओर अग्रेसर इस स्कूल को सभी “मेरा स्कूल स्मार्ट स्कूल” कहते हैं।

