रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:
छात्र संगठन ने सहायक आयुक्त जिला झाबुआ को ज़िले एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर भवन, छात्रवृति व पुस्तके एवं स्कूल ड्रेस नहीं मिलने पर भेंट कर अवगत कराया कहा की झाबुआ जिला एक आदिवासी बाहुल्य जिला है और झाबुआ जिले के कुंदनपुर, नाहरपुरा, एवं ज़िले के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक विद्यालय माध्यमिक विद्यालय है जिसकी स्थिति काफी खराब है स्कूल भवन जर्जर हैं ओर भवन गिरने की कगार पर है और ग्रामीण क्षेत्रों की स्कूलों में अधिकांश टीचर जातें नहीं हैं कुछ स्थानों पर भाड़े के टीचर भी हैं।

स्कूल भवन भी जर्जर हैं ऐसे में अगर कोई जन हानि होती है तो उसकी जिम्मेदारी कोन लेगा बारिश के दिनों में छत से पानी गिरता है एसे में गरीब आदिवासी बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है कक्षा 6,7,8, वीं के छात्र छात्राएं एक ही कमरे में ठुस ठुस कर बैठ कर अध्यन करते हैं। एसे में बच्चों का भविष्य क्या होगा ऐसी स्थिति में गरीब आदिवासी बच्चे कैसे पढ़ाई कर पाएंगे बच्चों को अभी तक पुस्तक भी नहीं मिली पाई है और छात्रवृति एवं स्कूल ड्रेस भी नहीं मिली है प्रशासन के नुमाइंदे क्या देख रहा है। पुरे ज़िले में ब्लाक अधिकारी सरकारी कार्यालय में सरकारी चेयर पर बेठे रहते हैं फिल्ड में जाते नहीं है ऐसे में ग्रामीण स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की कोई सुध लेने वाला नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र की स्कूलों के भवन जर्जर हो चुका है अगर स्कूल में कोई घटना घटी तो उसकी संपूर्ण ज़िम्मेदारी शासन प्रशासन की रहेगी।
इन समस्याओं को जल्द से जल्द पुरा नहीं किया गया तो आदिवासी छात्र संगठन उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा जिसकी संपूर्ण ज़िम्मेदारी शासन प्रशासन की रहेगी।
जिला अध्यक्ष आदिवासी छात्र संगठन झाबुआ कमलेश परमार, पार्षद विनय भाबोर, पंकज पलिया, अजीत, सुरेश, रविन, जितेन, हरीश, अतुल, जेरम, रमेश, सुनिल, अर्जुन, अविनाश, हरीश, महेश, मनीष कलेश आदी छात्र संगठन के पदाधिकारीयों ने तत्काल समस्याओं से निजात दिलाने की मांग की है।

