वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

गरीब बेसहारा असहाय व खुले आसमान के नीचे गरीब बेसहारा असहाय व खुले आसमान के नीचे रहने वालों को सरकार के साथ-साथ समाज के साधन संपन्न लोगों को बढ़ती ठंड में मदद के लिए खुले मन से आगे आना चाहिए।सरकार की मंशा के अनुसार प्रशासन को ठंड के प्रकोप से बचाने के लिए अलाव व कम्बल वितरण में विलंब नहीं करना चाहिए जीवन सभी का मूल्यवान है गरीब अमीर हो या साधन सम्पन्न हो या साधन विहीन मूल्याकंन सभी का होना चाहिए, बेसहारा बेघर और गरीब लोगों की जिंदगी देख कर ऐसा लगता है कि देश में ऐसे लाखों लोग रहते हैं जिनकी जिंदगी जानवरों से भी गई गुजरी है।न सिर छिपाने के लिए कोई झोपड़ी न खाने के लिए भोजन और न पहनने के लिए कपड़ा न ढंड से बचने के लिए गर्म कपड़े व भुखमरी और बीमारियों से हजारों लोग मर जाते हैं। देश में इस तरह की तमाम जगहें हैं जहां लोगों को सिर छिपाने के लिए ऐसा घर नहीं है जहां व ओस,कोहरे और विकट ठंड में खुद को सुरक्षित कर सकें।
लेकिन कहते है कि समय के अनुसार ऋतुओं में परिवर्तन प्रकृति नियम है। निश्चित अवधि के बाद मौसम का बदल स्वागतयोग्य होता है। देश में सर्दी का मौसम अप पूरे रंग में नजर आ रहा है और चारों ओर ढंड का प्रकोप है। सर्दी का मौसम बुजुर्गों गरीबों के लिए विशेष कष्टदायक होती है। इनके लिए सरकार को विशेष इंतजाम करने चाहिए बढ़ती ढंड की वजह से स्कूल का समय बदल दिया गया है। सड़कों और बाजारों में सन्नाटा पसरा है दिहाड़ी मजदूरों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। सरकार की ओर से प्रत्येक भीड़ वाले स्थानों पर अलाव व्यवस्था एवं जरूरतमंदों को कंबल वितरण करने चाहिए। लेकिन बढ़ती ठंडक के आगे सरकारी सहायता ऊंट के मुँह में जीरा के समान साबित होती है। सरकार साथ-साथ समाज के संपन्न लोगों को गरीबों की खुलेमन से मदद के लिए आगे आना चाहिए ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को बढ़ती ठंड के प्रकोप से बचाया जा सके।

