गुलशन परुथी/मनीष माहौर, ग्वालियर (मप्र), NIT:

मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र की सुप्रीम कंपनी में ब्रह्माकुमारीज के द्वारा आंतरिक शांति एवं मानसिक कल्याण विषय पर एकदिवसीय कार्यक्रम रखा गया। जिसमें ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन ने कंपनी के अधिकारीयों एवं कर्मचारियों को अपने उद्बोधन से संबोधित किया। व्यक्ति शांति की चाह लेकर साधनों की तरफ दौड़ लगा रहा है, जैसा कि हम देख पा रहे हैं। साधनों से मिलने वाली शांति अल्पकाल की होती है, लेकिन आवश्यकता है आंतरिक शांति की। जिसके लिए हमें अपने विचारों पर ध्यान एकाग्र करना होगा। क्योंकि विचार ही वह बीज है जो हमें मन की शांति प्राप्त करा सकता है। रही बात मन के कल्याण की, उसके लिए हमें कुछ बातों पर ध्यान रखना होगा।
1- सदा हमें कल्याण अर्थ ही विचार करना है।
2- जैसा भी वातावरण है उसे हमें स्वीकार करना होगा। 3- आसपास की हर बात को, व्यक्ति के विचारों को स्वीकार करते हुए खुश रहना होगा।
4- हर बात में कल्याण है यह बात मन में पक्का करना होगा। जब हम इन चार बातों को जीवन में उतार लेंगे तो हम अपने मन के साथ-साथ जीवन का और सबका कल्याण कर सकते हैं। इसी कड़ी में कार्यक्रम के अंतर्गत ब्रह्माकुमार महेश भाई ने अपना सत्य परिचय देते हुए बताया। मैं कहने वाला शरीर दिन भर में कई बार मैं और मेरा कहता है।
वास्तव में, मैं कहने वाली चैतन्य शक्ति आत्मा है। जब हम अपने असली स्वधर्म में टिकते हैं। अपने असली स्वरूप ज्योति बिंदु को पहचानते हैं और अपने असली घर शांतिधाम की याद करते हैं तथा जो हमारा वास्तव में परमपिता शिव शांति का सागर है, उनसे अपना संबंध जोड़ते हैं। तभी हम सच्ची शांति की प्राप्ति कर पाते हैं और अच्छे-अच्छे विचार करके अपने मन को, विचारों को, भावनाओं को, विश्व की सभी आत्माओं के लिए कल्याण की शुभ कामनाएं दे पाते हैं।
कार्यक्रम में बहुत सुंदर एक्टिविटी कराकर और कुछ दृढ़ संकल्प कराकर कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी श्रोताओं को आने वाले भविष्य के लिए आश्वासन दिया, जो होगा बहुत अच्छा होगा। कार्यक्रम में कंपनी के अधिकारियों ने ब्रह्माकुमारी संस्था से आये हुए भाई बहनों को धन्यवाद दिया और बोले दिनभर कंपनी में कार्य करते हुए विचारों में कंपनी की ही बातें आती रहती है और जब ऐसे प्रोग्राम किए जाते हैं तो उनसे मन के विचार परिवर्तन होते ही है। इसीलिए इस प्रकार के कार्यक्रम होते ही रहना चाहिए।

