काम करोड़ों के लेकिन जानकारी के नाम पर अता पता लापता, 22 साल बाद तीस साल के विकास का आरंभ, ज़मीन के नीचे 200 और ऊपर बन रही 100 करोड़ की सड़कें | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

काम करोड़ों के लेकिन जानकारी के नाम पर अता पता लापता, 22 साल बाद तीस साल के विकास का आरंभ, ज़मीन के नीचे 200 और ऊपर बन रही 100 करोड़ की सड़कें | New India Times

जलगांव एक ऐसा ज़िला है जिसे 2014 के बाद विकास के नाम पर ठेकेदार और नेताओं के अति आर्थिक शोषण का शिकार होना पड़ा। जलगांव, धूलिया, नासिक 200/300/500 करोड़ रुपए के चुनावी जुमला पैकेज को याद कर के विपक्ष को अपना वोट शिफ्ट कर रहे हैं। जामनेर में 2003-2008 के दौरान नगर परिषद में सुभाषचंद बोहरा (राजू बोहरा) के अध्यक्ष रहते कांग्रेस शासित राज्य सरकार से जो प्रोजेक्ट मंजूर हो कर मिले थे उन्हीं को भाजपा की ओर से आज 2024 के अंत तक पूरे करने का जुगाड़ किया जा रहा है। इसमें शिव और भीम सृष्टि यह दो वो स्मारक है जो विधानसभा चुनाव के पहले भाजपा ने पायलट प्रोजेक्ट बना दिए हैं। नगर परिषद सृजन के 22 साल बीत जाने पर विधायकी के तीस सालों को मंत्री पद की लाल बत्ती से चमकाने की कोशिश हो रही है। 22 सालों में 9 साल कांग्रेस गठबंधन और 13 साल भाजपा को मिले। बोहरा के कार्यकाल में शहर ने पहली बार सीमेंट की सड़कें देखी फिर भाजपा ने डामर की दिखाई फिर अब सीमेंट की दिखा रही है। 112 किमी सड़कों पर 200 करोड़ से अधिक पैसा फूंका जा चुका है।

काम करोड़ों के लेकिन जानकारी के नाम पर अता पता लापता, 22 साल बाद तीस साल के विकास का आरंभ, ज़मीन के नीचे 200 और ऊपर बन रही 100 करोड़ की सड़कें | New India Times

वर्तमान में 100 करोड़ से अधिक के फंड से सीमेंट सड़के बन रही है। पूरे मिनी बारामती में एक भी ऐसा सरकारी काम नहीं जिसकी जानकारी सार्वजनिक करने वाला बोर्ड प्रशासन ने कहीं भी लगाया गया हो। टैक्स पेयर जनता को पता हि नहीं चलता की उनका पैसा किस योजना पर कहां कितना खर्च किया गया है। कुछ अभिलाषी दूरबीन से ठेकेदार का पता लगाते हैं पर लिखने और वायरल करने में डेटा बचाने की कंजूसी के साथ एक्स्ट्रा डेटा खरीदने का लालच रखते हैं। बीड के किसी सरडा या अरोड़ा को सड़क निर्माण के लिए आमंत्रित किया गया है। सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान इस लिए रखा जा रहा है ताकि 2029 और 2030 के चुनावों में इस नेक काम का जिक्र प्रचार में किया जा सके। फिलहाल तो आम जनता की मांग है कि नगर परिषद के प्रशासक तमाम विकास कार्यों के वर्क परमिट को जनता के बीच सार्वजनिक करे।

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