अली अब्बास, ब्यूरो चीफ, मथुरा (यूपी), NIT:

जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्था, मथुरा (उ.प्र.) तथा जयगुरुदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट, मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में पारम्परिक रूप से आयोजित पांच दिवसीय जयगुरुदेव गुरुपूर्णिमा सत्संग मेला का आज समापन हो गया। मेले में भाग लेने आये श्रद्धालुओं की वापसी मेले के पूजन व संस्था प्रमुख पूज्य पंकज जी महाराज के सत्संग कार्यक्रम के बाद शुरू हो गयी थी। प्रशासनिक सहयोग से गुरुपूर्णिमा का मेला सकुशल निर्विघ्न सम्पन्न हो गया। आयोजकों ने सम्पन्नता के बाद राहत की सांस ली है। उमड़े श्रद्धा के शैलाब के बावजूद सब व्यवस्थायें शान्तिपूर्वक की गईं। कुल 16 जोड़ी दहेजरहित विवाह सम्पन्न हुये।
समापन के दिन प्रातःकाल सत्संग सुनाते हुये राष्ट्रीय उपदेशक एवं महामन्त्री बाबूराम यादव ने कहा कि सन्त किसी वेशभूषा, पहनावा या तिलक चन्दन आदि का नाम नहीं होता। स़अन्तः इति सन्तः जो अन्त के साथ हो गया। अनन्त परमात्मा को पा गया, जिसने जीते जी प्रभु मालिक का दर्शन कर लिया, वही सन्त होता है। ‘‘सत्तपुरुष जिन जानिया, सतगुरु तिसका नाम।’’ कलयुग में सन्तों ने सुरत शब्द योग (नाम योग) साधना का मार्ग खोला। पिछले युगों की कठिन साधना पद्धतियों से जीव का कल्याण नहीं हो सकता, घर छोड़कर साधू बनने वालों को भगवान कैसे मिलेगा।
उन्होंने कहा कि देश में अच्छे समाज के निर्माण के लिये सबको शाकाहार एवं नशा मुक्ति का प्रचार करना चाहिये। चरित्र को मानव धर्म की सबसे बड़ी पूंजी बताया। समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिये व्यापक जनजागरुकता की जरूरत है। सत्संग में राष्ट्रीय उपदेशक सतीश चन्द्र ने गुरु महिमा की चर्चा की और आगामी 8 दिसम्बर से 12 दिसम्बर तक आयोजित 76वें पावन वार्षिक भण्डारा महापर्व में भाग लेने का सादर निमन्त्रण दिया।
मेले की निर्विघ्न सम्पन्नता पर संस्था प्रमुख पूज्य पंकज जी महाराज ने समस्त भाग लेने वाले श्रद्धालुओं, व्यवस्था में सहयोग करने वाले स्वयं सेवी कार्यकर्ताओं, पुलिस प्रशासन, व्रजवासियां, क्षेत्रीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया और निर्विघ्न सम्पन्नता पर सन्तोष व्यक्त किया।

