रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बडोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

जीवदया के संस्कार जैन दर्शन के प्राण है जिसे परम्परागत तरीके से जैन धार्मिक पाठ शाला व समय-समय पर होने वालें धार्मिक सांस्कृतिक व परपरागत उत्सव को जीवदया से युक्त आराधना से मनाने की प्रेरणा गुरुभगवंतों व स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा दी जाती है।
ऐसे ही देश के प्रमुख संस्कृतिक पर्व दीपावली पर जब वीर प्रभु महावीर स्वामी का निर्वाण कल्याणक व गौतम स्वामी का केवलज्ञान कल्याणक पर बच्चों को जीवदया का महत्व समझाते हुए पटाखे नही फोड़ने का संकल्प दिलाया। ऐसे में क्वीना चौपड़ा, तोषानी चौपड़ा सहित 15 से अधिक बच्चों ने दीपावली पर जीवदया धर्म अपनाते हुए पटाखें नही फोड़ने का संकल्प लिया।
अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक एवं महिला परिषद द्वारा सभी बच्चों का सम्मान कर उन्हें पुरुस्कृत किया गया। सभी बच्चों को राष्ट्रीय कार्यालय से आया उपहार भी भेंट किया गया।
इस अवसर पर परिषद के वरिष्ठ उमेश पीचा, रमणलाल मुथा, तेजेश कटारिया महिला परिषद की प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य श्रीमती पूर्णिमा रूपेश पोरवाल, सुशीला मुथा, प्रतिभा लोढ़ा आदि ने संस्कारित बच्चों की प्रसंशा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
