कौन हैं मोईन अंसारी, क्यों छोड़ी भाजपा और क्यों शामिल हुए कांग्रेस में ? पढ़िए यह खबर | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

कौन हैं मोईन अंसारी, क्यों छोड़ी भाजपा और क्यों शामिल हुए कांग्रेस में ? पढ़िए यह खबर | New India Times

भाजपा में विगत 3 से 4 वर्षों से पार्टी की साईड लाईन में चल रहे और भाजपा के मौजूदा कर्णधारों द्वारा नज़र अंदाज़ करने से पीड़ित होकर भाजपा परिवार के प्रखर ओजस्वी वक्ता और माया नाज़ सियासी घराने मौलाना हिफ्जुर रेहमान अंसारी (लाल टोपी) के चश्मे चिराग़ मोइन अंसारी ने सोमवार को विधिवत रूप से कांग्रेस के दिग्गज राष्ट्रीय नेता, राज्यसभा सांसद, भारतीय राजनीति के चाणक्य के नाम से मशहूर श्री दिग्विजय सिंह जी की मौजूदगी में बुरहानपुर में बुरहानपुर विधायक शेरा भैया की चुनावी आमसभा में मंच से कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर लिए जाने से उन की चर्चा बुरहानपुर के सियासी मंज़र नामे पर जोरों से चल रही है। एक ज़माने में मौलाना हिफ्जुर रहमान अंसारी मरहूम (लाल टोपी) की रिहाइश गाह मोमिनपुरा स्थित जहांगीर मंज़िल से शहर की सियासी सरगर्मियां संचालित होती थी। कहा जा सकता है कि एक ज़माने में उनकी रिहाइश गाह ज़िले की सियासत का केंद्र बिंदु हुआ करती थी। इसी मोहल्ले में कांग्रेस नेता स्वर्गीय ठाकुर नवल सिंह भी निवास करते थे। जिनके दो बेटे स्वर्गीय ठाकुर शिवकुमार सिंह और स्वर्गीय ठाकुर महेंद्र सिंह संसद सदस्य थे और एक बेटे ठाकुर सुरेंद्र सिंह उर्फ़ शेरा भैया बुरहानपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।

कौन हैं मोईन अंसारी, क्यों छोड़ी भाजपा और क्यों शामिल हुए कांग्रेस में ? पढ़िए यह खबर | New India Times

मौलाना हिफजुर रहमान और ठाकुर नवल सिंह मिलकर सामूहिक रूप से सियासी सरगर्मियां संचालित करते थे। बुरहानपुर के हर राजनैतिक दल के दिग्गज नेता मौलाना साहब की चौखट पर तशरीफ़ लाकर उनसे मार्गदर्शन और आशीर्वाद लिया करते थे। एक ज़माने में भाजपा की हर आम सभा में और भाजपा के हर सियासी स्टेज पर एक ओजस्वी वक्ता के रूप में मोइन अख्तर अंसारी के नाम का डंका बजता था। 1982 और 1985 में भाजपा के कद्दावर नेता, तत्कालीन प्रधानमंत्री, भारत रत्न माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की आम सभा के संचालन की सफल जिम्मेदारी भी मोईन अंसारी को दी गई थी। यह भी एक सौभाग्य की बात थी कि श्री अंसारी के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा के तत्कालीन स्पीकर स्वर्गीय श्री पंडित बृजमोहन मिश्रा ने अपना संबोधन दिया था और उसके बाद स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी ने संबोधित किया था। उस ज़माने में अल्पसंख्यक समाज के लोग भाजपा से जुड़ने से कतराते थे तथा अल्प संख्यक समाज के चंद लोग, जिनके नाम उंगलियों पर गिने जा सकते हैं, वह भाजपा के साथ थे।

अल्पसंख्यक मुस्लिम समाज से ओजस्वी वक्ता के रूप में 80 90 के दशक में मोइन अंसारी भी अग्रणी, महत्ती एवं सक्रिय भूमिका में थे। लेकिन एमपी की पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती द्वारा प्रखर भाजपा नेता, ओजस्वी वक्ता मोइन अख्तर अंसारी को बुरहानपुर विधानसभा चुनाव का टिकट देने के बाद और उनका टिकट मिलने के बाद उनके साथ दिवंगत सांसद ने सियासत का खेल खेलकर उनके टिकट को षडयंत्र पूर्वक वापस करवा कर उनके पॉलीटिकल कैरियर को एक तरह से खत्म कर दिया गया था। श्री मोइन अंसारी को विधानसभा का टिकट दिलाने में बुरहानपुर के वरिष्ठ पत्रकार अकील आज़ाद और इक़बाल अंसारी की भी महत्ती भूमिका रही थी। टिकट वापस करने के बाद से अल्पसंख्यक समाज के यह नेता साइड लाइन चल रहे थे। वहीं भाजपा के दोनों खेमों सहित भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा मुसलसल नज़र अंदाज़ किए जाने से पीड़ित होकर भाजपा छोड़कर अपने कैरियर को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली है। मौजूदा विधानसभा इलेक्शन 2023 में वे कांग्रेस पार्टी के बुरहानपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी ठाकुर सुरेंद्र सिंह उर्फ़ शेरा भैया के समर्थन में खुलकर काम कर रहे थे।

कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं कांग्रेस के राज्यसभा सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बुरहानपुर आगमन पर चुनावी सभा के मंच पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने उन्हें कांग्रेस में शामिल कर उनका स्वागत किया। लगभग दो दशक तक मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता का केंद्र बिंदु रही लेकिन पार्टी के शीर्ष नेताओं ने उन्हें नज़र अंदाज़ किया और उन्हें कहीं भी प्रमोट नहीं किया। पूर्व कैबिनेट मंत्री ने भी श्री अंसारी को नज़र अंदाज़ करते हुए अपने खेमे से अल्पसंख्यक समाज के कुछ लोगों को आगे बढ़ाया। उम्र के इस पड़ाव पर उन्होंने कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने का जो फैसला आज किया है, शायद वह दो दशक पहले कर लेते तो उन्हें भी मक़ाम ए नाज़ हासिल हो जाता। जब कि उसे जमाने में मदरसा बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष प्रोफेसर हलीम साहब (इन्दौर) उनसे कई बार कांग्रेस ज्वाइन करने के लिए मान मनव्वल करते रहे, लेकिन मोइन अंसारी ने तब यह फैसला नहीं किया। जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई तब भी वे मुस्लिम समाज के गुस्से का शिकार बने, उस ज़माने में लोगों ने उन्हें हिक़ारत की नज़रों से देखा, तब भी उन्होंने भाजपा का दामन नहीं छोड़ा। लेकिन उम्र के आखिरी पड़ाव में भाजपा द्वारा नज़र अंदाज़ किए जाने से उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन करने का फ़ैसला लिया। उम्र के इस पड़ाव में उनका कांग्रेस ज्वाइन करने का फैसला कहां तक दुरुस्त है ? वह बेहतर जानते और समझते हैं। लेकिन कांग्रेस के मंच से आने पर जनता का बड़ा आशीर्वाद और दुआएं उन्हें मिल रही है और कांग्रेस के वरिष्ठ नेतागण भी उन्हें हाथों-हाथ ले रहे हैं। हम तो केवल उनके उज्जवल राजनैतिक भविष्य की मंगल कामना ही कर सकते हैं।


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