स्नेहलता वागरेचा ने 92 उपवास का पारणा किया सादगी पूर्वक | New India Times

रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बडोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

मेघनगर तप-भूमि पर अणु-वत्स पुज्य गुरुदेव श्री सयंत मुनीजी म सा आदि ठाणा 4 का सफल ऐतिहासिक वर्षावास निरन्तर गतिमान है।
श्रमण श्रेष्ठ जिनशासन गौरव आचार्य प.पूज्य उमेश मुनीजी के शिष्य एवम आगम विशारद प्रवर्तक देव पूज्य जिनेन्द्र मुनीजी की आज्ञा अनुवर्तीय अत्मोथान चातुर्मास 2023 मेघनगर में आसपास के संपूर्ण क्षेत्र डूंगर मालवा निमाड़ की सबसे बड़ी तपस्या संपन्न हुई

वे पहचान की पर्याय बन गई हैं

मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले का एक छोटा-सा कस्बा है-मेघनगर यहां की निवासी हैं तप-ज्योति, तप चक्रेश्वरी, महतारी आदि अन्यान्य विभूषणों से विभूषित स्नेहलता बहन वागरेचा धर्म सहायिका हंसमुखलालजी वागरेचा। यह एक ऐसी विभूति हैं, जिसने अपने कृतित्व से कुल-परिवार, संघ-समाज,ग्राम,धर्म का नाम गौरवान्वित कर दिया।
उनकी शनिवार 92 उपवास की सुदीर्घ तपश्चर्या का सादगी पूर्वक पारणा हुआ ।

वे इससे पहले सतत 111 व 91 उपवास की दुष्कर, घोरातिघोर तपस्या कर चुके हैं।
उल्लेखनीय है कि तपाराधना दौरान महज़ गर्म जल वह भी दिन के समय सीमित मात्रा में ही लेते हैं।

वे जरूर उग्र तपाराधना करते हैं पर वे स्वभाव से बिल्कुल सहज सरल,शांत औऱ मृदु हैं। उग्रता व आवेश उनके पास फटकता नहीं है।

वास्तव में वे दूषणों से दूर स्नेह औऱ वात्सल्य की लता हैं।यथा नाम तथा गुण। जैसा नाम वैसा काम।

धरती पर तन से सुंदर इंसान तो अनेकों हैं पर वे तन से ही नहीं मन-वचन से भी सुंदर नहीं अतिसुंदर है।
उनके मन की निर्मलता, विराटता का क्या कहना।
वे तन से, तप से,धन से आदि कई विशेषताओं से समृद्ध है पर अहंकार से कोसों दूर हैं।
इन्हीं विशेषताओं के कारण उनसे मिलने वाला हरेक उनके मुख मंडल पर तपोमूर्ति तेज आज्ञा चक्र पर जगमग करते भगवा तिलक से अभिभूत हो जाता है।


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