गुस्से में किसान, सरकार को रुला रहा प्याज़, कपास की तरह खोखले साबित हो रहे हैं मंत्रियों के आश्वासन, नेताओं के लच्छेदार भाषणों से किसानों को गुमराह करने का हो रहा है प्रयास | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

गुस्से में किसान, सरकार को रुला रहा प्याज़, कपास की तरह खोखले साबित हो रहे हैं मंत्रियों के आश्वासन, नेताओं के लच्छेदार भाषणों से किसानों को गुमराह करने का हो रहा है प्रयास | New India Times

प्याज की निर्यात पर मोदी सरकार द्वारा 40 प्रतिशत टैक्स लगाने के फैसले से नाराज किसान सरकार के विरोध में सड़कों पर उतरने लगे हैं। इस नाराजगी को दूर करने के लिए केंद्र ने 2410 रु प्रति क्विंटल दर से नाफेड की सहायता से दो लाख मैट्रिक टन प्याज खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके पहले प्याज मार्केट में 2700 रु क्विंटल बिक ही रहा था, किसानों को 300 रु का घाटा हो गया। देश में पैदा होने वाले 225 लाख मैट्रिक टन प्याज में 105 लाख मैट्रिक टन अकेले महाराष्ट्र में होता है। आज राज्य के किसानों के पास 40 लाख मैट्रिक टन प्याज उपलब्ध है। निर्यात महंगा होने पर 38 लाख मैट्रिक टन प्याज कौन खरीदेगा, एक्सपोर्ट क्वॉलिटी के प्याज़ को औने पौने दाम से लोकल बाजार में बेचना पड़ेगा। प्याज की सबसे बड़ी मंडी लासलगांव में किसान और व्यापारी हड़ताल पर हैं। एक के बाद एक किसान संगठन सड़कों पर उतर रहे हैं। शीर्ष अदालत द्वारा गैर कानूनी करार दी जा चुकी शिंदे-फडणवीस सरकार के तमाम मंत्रियों का जनता के बीच कोई इकबाल नहीं बचा है। लोकसभा चुनावों का नफा नुकसान टटोलने और किसानों के आंदोलन को ख़त्म करने के लिए भाजपा ने अपने नेताओं को किसानों के बीच उतारना शुरू कर दिया है। नासिक के लासलगांव में गिरीश महाजन ने चुनिंदा किसानों से संवाद स्थापित किया जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा प्याज़ की निर्यात को लेकर लिए गए फैसले पर सरकार और उनकी पार्टी की भूमिका साफ़ करने के बजाये लंबा चौड़ा लच्छेदार भाषण दिया। महंगाई से त्रस्त खेती व्यवसाय पर खेद प्रकट करते हुए किसानों की दोगुनी आय, मोदी सरकार की किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी देने लगे। कपास के मामले में भाजपा ने किस प्रकार की कूटनीति अपनाई थी उसे किसान अब तक भूले नहीं हैं।

गुस्से में किसान, सरकार को रुला रहा प्याज़, कपास की तरह खोखले साबित हो रहे हैं मंत्रियों के आश्वासन, नेताओं के लच्छेदार भाषणों से किसानों को गुमराह करने का हो रहा है प्रयास | New India Times

12 हजार के दाम वाला कपास मोदी सरकार की गलत आयात नीति के कारण 6 हजार रुपए में बेचना पड़ा। प्याज़ के मामले से NDA में शामिल शिंदे और अजीत पवार गुट ने किनारा कर लिया है। राज्य सरकार के मंत्री प्याज़ के मसले पर अनर्गल बयानबाज़ी करने में लगे हैं। राष्ट्रीय मीडिया में प्याज़ आंदोलनों से जुड़ी ख़बरें गायब कर दी गई हैं। किसान अपनी लड़ाई लड़ने के लिए सोशल मीडिया पर भरोसा कर रहा है। चुनावी रैलियों के मंच से देश के प्रति अतिव प्रेम और राष्ट्रवाद से ओतप्रोत जयकारे और नारे लगाने वाले भाजपा के नेता किसानों के सवालों से भाग रहे हैं। विपक्षी गठबंधन इंडिया की ओर से एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने किसानों के पक्ष में मोर्चा संभाल लिया है।


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