अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

राजधानी भोपाल में शैलेंद्र सिंह वाघेला नामक वक्ति ने सोशल मीडिया पर एक विवादित पोस्ट कर माहौल खराब करने की कोशिश की है। बताया जा रहा है कि यह वक्ति भोपाल शहर में संस्कृति बचाओ मंच एवं करणी सेना का सदस्य है। उस ने फेस बुक पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि सम्भलना और समझना हमें ही पड़ेगा, क्या हमारे देवी देवताओं का उपयोग हमारे ही लोगों के गले काटने वाले समाज के व्यापार करने के उपयोग में लाने के काम मे आएंगे… ????? यह एक विधर्मी की दुकान है जिस पर हमारे देवी देवताओं की तस्वीरें लगाकर एक अन्य धर्म के व्यक्ति के द्वारा व्यापार किया जा रहा है.

यह दुकान जेल रोड भोपाल पर आसाराम बापू चौराहे से थोड़ा सा आगे बाएं हाथ पर स्थित है. इस जगह पर कई सारे बड़े भाई का कुर्ता और छोटे भाई का पजामा पहनने वाले लोगों ने अवैध रुप से सब्जियों व फलों की अस्थाई दुकानें लगा रखी है जो कि सभी अवैध हैं। मैंने 21-07-2022 को करोंद जाते समय इस दुकान पर शक होने पर रूक कर जवाब जानना चाहा तो दुकान पर रुककर एक दर्जन केले लिए और पेमेंट नगद ना देकर ऑनलाइन किया तो पता लगा कि वह दुकानदार का खाता मोहम्मद माज़िद के नाम से था जिसका स्क्रीन शाट मैंने आपको शेयर किया है। वहां उनकी कई दुकाने हैं।

इस तरह की विवादित पोस्ट की भनक जब एपीसीआर के ज़िला अध्यक्ष अनवर पठान को लगी तो उन्होंने इसकी सच्चाई जानने के लिए लगभग रात 7:30 बजे उस दुकान पर पहुंचे तो पता चला कि उस दुकान के मालिक का नाम विक्की यादव है और वह कई वर्षों से दुकान लगा रहे हैं मगर उनके पास अकाउंट ना होने के कारण सब्जी मंडी में विक्रेता मोहम्मद मजीद का क्यूआर कोड इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में अनवर पठान ने तत्काल थाना गांधीनगर के टीआई महोदय को फोन कर इस घटना से अवगत करवाया।

अनवर पठान का कहना है कि टी आई महोदय ने मुझसे कहा कि आप मुझे फोटोस वगैरह व्हाट्सएप करिए, मैंने उन्हें व्हाट्सएप किए कुछ ही देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची और उन्होंने दुकान के मालिक विक्की यादव से बातचीत की उनके बयान दर्ज किए उसके बाद यह खंडन हो गया कि यह वाकई में दुकान विक्की यादव की है और यह दुकान किसी मुस्लिम व्यक्ति की नहीं है सिर्फ मोहम्मद माजिद का क्यूआर कोड का इस्तेमाल हो रहा है।
थाना गांधीनगर टीआई महोदय का एपीसीआर जिला टीम ने धन्यवाद करते हुए कहा कि जब तक हमारे बीच ऐसे अधिकारी मौजूद रहेंगे तब तक भोपाल की फिज़ा खराब नहीं हो सकती।
