रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बडोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

मां नर्मदा के प्रति अटूट श्रद्धा, आस्था और संकल्प का अद्भुत उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब 105 दिवसीय नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर दिलीप सोलंकी अपने गृहग्राम पहुंचे। गांव में उनके आगमन को लेकर पहले से ही उत्साह का माहौल बना हुआ था। जैसे ही वे गांव की सीमा में पहुंचे, नगरवासियों ने ढोल-नगाड़ों, जयकारों और पुष्पवर्षा के साथ उनका भव्य स्वागत किया।
इसके बाद मधुकन्या नदी तट स्थित महाकाल राजा के दर्शन किए गए। मंदिर परिसर के बाहर दिलीप सोलंकी के स्वागत एवं सम्मान में सर्व समाज द्वारा समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षक हेमेंद्र कुमार जोशी, हरिराम पडियार, भूपेंद्र सिंह राठौर सेमलिया, मनोहर सिंह राठौर सेमलिया, परीक्षित सिंह राठौर, नरेंद्र खुडवेल, गोपाल राठौड़, कैलाश राठौड़, मंडल अध्यक्ष जितेंद्र राठौड़, श्रेणिक कोठारी, नारायण प्रजापत, राजेंद्र मिस्त्री, प्रकाश राठौड़, एडवोकेट नरेंद्र सोलंकी झाबुआ, नंदू दैय्या, सुरेश राठौड़, जगपाल सिंह राठौर, झमक बर्फा, शांतिलाल सोलंकी, रमेश परवार, मोहन माली, बबलू राव, गगन सोलंकी, देवकुंवर पडियार सहित अनेक लोगों ने पुष्पमालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया एवं कुशलक्षेम पूछी।
इसके पश्चात ढोल-नगाड़ों के साथ दिलीप सोलंकी का गांव के प्रमुख मार्गों पर जगह-जगह स्वागत किया गया, जहां श्रद्धालुओं और समाजजनों ने पुष्पमालाएं पहनाकर उनका अभिनंदन किया। महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से आरती उतारकर स्वागत किया, वहीं युवाओं और बुजुर्गों ने “नर्मदे हर” के जयघोष से पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
परिक्रमा पूर्ण कर लौटे सोलंकी ने बताया कि 105 दिनों की यह यात्रा अत्यंत कठिन होने के बावजूद मां नर्मदा की कृपा से सफलतापूर्वक पूर्ण हुई। यात्रा के दौरान उन्होंने अनेक धार्मिक स्थलों के दर्शन किए और संत-महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव है।
नगरवासियों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताते हुए कहा कि आज के समय में इतनी लंबी और कठिन नर्मदा परिक्रमा पूर्ण करना आसान नहीं है। सोलंकी की इस धार्मिक यात्रा से युवाओं को भी धर्म और संस्कृति से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।
स्वागत कार्यक्रम के दौरान समाजजन, ग्रामीण, युवा एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और देर तक लोग नर्मदा मैया के जयकारे लगाते रहे।

