नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

ईरान की इजाज़त पर हॉर्मूज समुद्र डमरूमध्य से LPG की हर एक खेप के लिए प्रतीक्षारत भारत को रशिया के मुनाफाखोर रवैय्ये से पेट्रोल डीज़ल की किल्लत और जनता को भारी महंगाई का सामना करना पड़ेगा। मोदी सरकार की फेल हो चुकी विदेश नीति के ख़िलाफ़ भारत के बड़े बड़े शहरों में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के घटक दल सड़को पर है।

ग्रामीण क्षेत्र में विपक्ष की ओर से कोई प्रतिरोध नज़र नही आ रहा है। जलगांव में कांग्रेस राष्ट्रवादी कांग्रेस शरद पवार गैस पर है। शिवसेना उद्धव ठाकरे द्वारा राष्ट्रीय मुद्दो को लेकर किए जा रहे आंदोलन अख़बारों ने गायब कर दिए है।
NCP(SP) ने तीनों कैबिनेट मंत्रीयों के गृह नगरों जामनेर , जलगांव , भुसावल में Epstein File’s भारत-अमरीका ट्रेड डील LPG-बढ़ती महंगाई के विरोध मे एक भी आंदोलन नही किया है। अजीत पवार की अकस्मात मृत्यु के डेढ़ महीने बीतने के बाद जामनेर NCP ने हादसे की जांच की मांग करी। केंद्र में बीजेपी विपक्ष में होती तो महाराष्ट्र की सड़कों पर प्रतिवाद का अतिवाद हो जाता।
अतीत मे संपन्न नगर परिषद , नगर पंचायत , महानगर पालिका के आम चुनाव में कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवारों को अचानक से मैदान से हटने या हटवाने के कथित व्यवहार आज भी आम वोटर्स के लिए रहस्य बने हैं।
निकाय चुनावों में नामांकन वापिस लेने वाले किसी भी तत्व की न जांच की गई , न तो किसी भी दोषी पदाधिकारी को पार्टी से निकाला गया। राहुल गांधी की तरफ़ से राष्ट्रहित में किया जा रहा संघर्ष आवाम के मन में कांग्रेस के लिए जगह बना सकता है लेकिन जलगांव जिले के स्थानीय निष्क्रिय नेताओं के चलते कांग्रेस और उसके सहयोगी दलो के लिए वोट में तब्दील होने के आसार कम है।

