शहडोल में आयल पेंट घोटाला: 24 लीटर पेंट के लिए 658 मजदूर, लाखों की लूट | New India Times

मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

शहडोल में आयल पेंट घोटाला: 24 लीटर पेंट के लिए 658 मजदूर, लाखों की लूट | New India Times

शहडोल जिले में शिक्षा विभाग से जुड़े दो भ्रष्टाचार के मामले सोशल मीडिया के जरिए प्रकाश में आया। जिसे आयल पेंट घोटाला का नाम दिया जा रहा है। मामले में मात्र 24 लीटर आयल पेंट को स्कूल की दीवारों पर लगाने के नाम पर लाखों रुपए का भुगतान किया गया। बिल का भुगतान भी हो चुका है। शहडोल जिले के ब्योहारी स्थित दो सरकारी स्कूलों में हाई स्कूल सक्कंदी और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपानिया ब्योहारी का है। इन दोनों स्कूलों में आयल पेंट खरीदने और उसे लगाने के नाम पर जो खर्च दिखाया गया है वह किसी भी सामान्य व्यक्ति को चौंकाने वाला आश्चर्य चकित मामला है। दोनों ही मामलों में एक हीं ठेकेदार सुधाकर कंस्ट्रक्शन का नाम सामने आया है। यह भी गौर करने लायक है कि दोनों बिल एक ही तारीख 5 मई 25 का लेख है।

ठेकेदार सुधाकर कंस्ट्रक्शन का कहना है कि उन्होंने नियम -कायदों का पूरा पालन किया गया है। और उनके सैकड़ों मजदूर और मिस्त्री इस काम में लगे थे, लेकिन यह बात स्पष्टीकरण उन आंकड़ों से मेल नहीं खाता जो बिलों में दर्शाए गए हैं। कार्यवाही की जायेगी-डीईओ जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मारपाची ने जांच की बात कही है उन्होंने कहा कि सामने आये भुगतान बिल मामले में हमने जांच शुरू करवा दी है।जांच में दोषी पाये जाने पर कार्यवाही की जायेगी। आयुक्त लोक शिक्षण करेंगें जांच प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने इस मामले में विभाग के सचिव और आयुक्त लोक शिक्षण को प्रकरण की तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। पहला मामला हाई स्कूल सक्कंदी में 4 लीटर आयल पेंट खरीदा,जिसकी कीमत 784 रुपये (196 प्रति लीटर) उल्लेख है। पेंट लगाने के लिए 168 मजदूरों और 65 मिस्त्रियों द्वारा काम कराया गया।

इन सभी का कुल 106984 रुपये भुगतान किया गया। दूसरा मामला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय निपानिया में 20 लीटर पेंट खरीदा गया। इसे लगाने के लिए 275 मजदूर और 150 मिस्त्रियों से काम कराने का उल्लेख किया गया, जिनका कुल 231650 रुपये भुगतान किया गया। इस खर्च में खिड़कियों और दरवाजों की रंगाई का खर्च भी शामिल हैं। परन्तु मजे की बात यह भी है कि भुगतान रसीद में जिला शिक्षा अधिकारी के भी हस्ताक्षर हैं। तो क्या जिला शिक्षा अधिकारी बगैर जांच परख किये ही आंख मूंदकर अपने पद मुद्रा सील हस्ताक्षर कर दिए। एक रसीद तो 5 मई 25 को काटी गई जिसमें जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा 4  मई 25 का हस्ताक्षर हैं यहां पर यह कहावत चरितार्थ हो रही है कि-अंधेर नगरी चौपट राजा। वाह रे शिक्षा विभाग, यहीं से शिक्षित किया जाता है और यहीं से भ्रष्टाचार की सीख दी जा रही है।

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