अशफ़ाक़ क़ायमखानी, सीकर/जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान में सालों से जकात का अधिकांश हिस्सा बाहरी लोग आकर ले जाते रहे हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से स्थानीय सामाजिक व धार्मिक संगठनों द्वारा जकात को स्थानीय स्तर पर इकट्ठा कर उसी क्षेत्र में उसका बेहतर उपयोग करने से सुखद परिणाम नजर आने लगे हैं। इस व्यवस्था को देखकर स्थानीय जकातदाता काफी खुश दिखाई दे रहे हैं।
राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, चूरू, झुंझुनूं जिलों के साथ डीडवाना-कुचामन जिले को मिलाकर देखने पर यह सामने आया कि इस रमजान माह में पहले की तुलना में स्थानीय सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने जकात को स्थानीय स्तर पर इकट्ठा करने की पहल बढ़ाई है। वहीं कुछ बड़े परिवार भी अपनी जकात को एकत्र कर अपने पारिवारिक ट्रस्ट में जमा कर रहे हैं और उसका उपयोग शरीयत के अनुसार कर रहे हैं। इसमें शिक्षा और गरीबों को व्यापार शुरू करने में सहायता देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि अगले वर्ष वे खुद जकात देने वालों की श्रेणी में आ सकें।
शेखावाटी में कई जगहों पर बिरादरी, गांव, शहर और मोहल्ला स्तर पर सामाजिक व धार्मिक संगठनों द्वारा जकात इकट्ठा करने की परंपरा पहले से रही है। लेकिन पिछले वर्ष से शुरू होकर इस वर्ष इकरा फाउंडेशन ने जकात फंड बनाकर रिकॉर्ड स्तर पर जकात संग्रह किया है। इस फाउंडेशन की साफ-सुथरी छवि के चलते सोशल मीडिया पर अपील के बाद करीब 50 लाख रुपये की जकात जमा हुई है। इस राशि का अगले एक वर्ष में बेहतर उपयोग कर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की योजना है। इसके अलावा भी कई अन्य स्थानीय संगठन हैं, जिन्होंने जकात संग्रह किया है।
कुल मिलाकर, स्थानीय संगठनों द्वारा स्थानीय स्तर पर जकात इकट्ठा कर उसी क्षेत्र में उपयोग करने के सकारात्मक परिणाम निश्चित रूप से देखने को मिलेंगे। इन संगठनों में उच्च शिक्षित और साफ छवि वाले लोगों के जुड़ाव से यह उम्मीद की जा रही है कि जकात का उपयोग अपने वास्तविक उद्देश्य के अनुसार किया जाएगा। हालांकि, इस पहल से उन लोगों में परेशानी देखी जा रही है जो पहले बाहर से आकर जकात एकत्र कर ले जाते थे।

