मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

समाजसेवक विनोद पांडेय निवासी परसिया ने मुकुन्दपुर अंचल पर चिंता करते प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि मुकुन्दपुर से रीवा 17 किलोमीटर और मैहर नया कलेक्ट्रेट 85 किलोमीटर वहीं परसिया से रीवा 22 किलोमीटर तो मैहर 90 किलोमीटर। और धोबहट से रीवा 22 किलोमीटर तो मैहर नया मुख्यालय 90 किलोमीटर और आमिन से रीवा 25 किलोमीटर तो मैहर 95 किलोमीटर और पपरा से रीवा 28 किलोमीटर मैहर 100 किलोमीटर तो राजनीति कर मैहर ले जाने वाले नेता मांफ करें इस अंतर का आर्थिक नुकसान सदा सदा के लिए कौन जिम्मेदार होगा।
साथ ही समय का नुक्सान होगा। मैहर का नया जिला मुख्यालय पोंड़ी में बनवाया जा रहा है। नेता लोग केवल अपने अपने स्वार्थ के लिए आमजनता को गुमराह करने में लगे हुए हैं।और जो नेता मुकुन्दपुर को धरोहर कह रहे हैं तो मेरा कहना है कि ऐसे नेता को जरा सा हिचकिचाहट नहीं आ रही है। यदि मुकुन्दपुर को धरोहर मानते रहे तो मुकुन्दपुर को दिये क्या मुकुन्दपुर में न थाना न तहसील न कालेज न राष्ट्रीय बैंक न आईटीआई कालेज, मात्र धरोहर कह देने से नहीं होता मुकुन्दपुर अंचल के मतदाताओं को प्रलोभन देकर बोट लेकर रफूचक्कर होते गये।
हर सुविधाएं ताला ले गये, मुकुन्दपुर अंचल के साथ सौतेला व्यवहार राजनीतिक नेताओं के द्वारा हमेशा किया जाता रहा और किया जा रहा है। वर्षों बीत गये सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुकुन्दपुर में एक्सरे मशीन दर्शन के लिए पड़ी है कोई भी राजनीतिक नेता ध्यान नहीं दिया। साथ ही उक्त केंद्र जरजर हालात में है। मुकुन्दपुर में 25 एकड़ जमीन शासकीय होते हुए भी ये नेता लोग कुछ भी नहीं कर पाये। मैं यह देख रहा हूं कि इस क्षेत्र की जनता की 25% जनता रीवा प्रतिदिन जाती आती रहती है। पूरा आवागवन रीवा से रहता है तो सोचनीय बात तो यह है कि जब प्रतिदिन यहां की 25% जनता रीवा जाती है तो अपने शासकीय कार्यों को भी कर लेगी राजस्व काम की भरपाई एक हिसाब से बहुत कम पैसे में क्या लेगी।
मुकुन्दपुर में केवल सम्पन्न लोग शासकीय भूमियों को अतिक्रमण किये है अतिक्रमण हावी है। ऐसे में मैं हर राजनीतिक नेता से क्षमा चाहता हूं मुकुन्दपुर, धोबहट, आमिन, परसिया, पपरा के साथ अन्याय न करें समीपवर्ती रीवा जिला में जुड़ने दें। इस क्षेत्र की साधारण जनता को अब अपने हाल में जीने दें।यदि अब इस क्षेत्र की जनता को समीपवर्ती रीवा जिला में जुड़ने नहीं देते हैं तो आमजनता के साथ धरना प्रदर्शन आमरण अनशन करेंगे जिसके दोषी राजनीतिक नेता होंगे और शासन प्रशासन जिम्मेदार होगा।
