अली अब्बास, ब्यूरो चीफ, मथुरा (यूपी), NIT:

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की संतुति पर उत्तर प्रदेश शासन की महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन द्वारा नियुक्त मथुरा में पॉक्सो न्यायालय में स्पेशल डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट द्वारा अपने सवा चार साल के कार्यकाल में ऐतिहासिक निर्णय कराकर देश की पहली सरकारी अधिवक्ता बन गयी हैं, जेल के कैदी ही नहीं अब तो बृजवासी भी उन्हें फांसी वाली मैडम बोलने लगे हैं। डीजीसी श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट ने अपने सवा चार साल के कार्यकाल के अंदर ऐतिहासिक निर्णय कराए हैं, इसके लिए उन्हें उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख गृह सचिव एवं डीजीपी द्वारा पुलिस मेडल एवं प्रशस्ति पत्र तथा अभियोजन विभाग के डीजीपी, एवं कमिश्नर अपर पुलिस महानिदेशक डीआईजी डी एम द्वारा प्रशस्ति पत्र भी देकर उनके कार्य की भूरि भूरि प्रशंसा भी की है, यही नहीं उन्हें लगातार दो बार से गणतंत्र दिवस की परेड में सरकार के कैबिनेट मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण सिंह द्वारा प्रशस्ति पत्र देकर के सम्मानित किया गया है।
वहीं जिले की सांसद श्रीमती हेमा मालिनी द्वारा भी प्रशस्ति पत्र देकर उनके कार्य की प्रशंसा की गई है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पॉक्सो न्यायालय में स्पेशल डीजीसी पद पर तैनात श्रीमती अलका उपमन्यु एडवोकेट ने एक फांसी की सजा घटित घटना के कोर्ट के 22 वे वर्किंग डे में दूसरी फांसी की सजा 35 दिन में और तीसरी फांसी की सजा 42 दिन में और चौथी फांसी की सजा 14 महीने में कराई है जो देशभर में अभियोजन विभाग में एक इतिहास है यही नहीं 42 घटनाओं में अपराधियों को आजीवन एवं कठोर सजा कराई तथा जो लोग पहले रिपोर्ट दर्ज करा देते हैं और फिर समझौता कर लेते हैं और कोर्ट में आकर अपने बयान से मुकर जाते हैं ऐसे डेढ़ सौ से अधिक केसों में 22 पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत जुर्माना आदि की सजा करा कर सरकार को लाखों का राजस्व जमा कराया है।

