नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

“सही शिक्षा से ही समाज की बेहतर व्यवस्था का निर्माण किया जा सकता है” भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की कही इस बात को आजादी के 75 साल बाद आज भी अनुभव किया जा सकता है। हमारे भारत में लाखों शिक्षा संस्थाएं है जो राष्ट्र निर्माण के काम मे लगी है। इसी में एक है जलगांव जिले की जामनेर तालुका एजुकेशन सोसायटी। 3 जनवरी 1919 को न्यू इंग्लिश स्कूल के नाम से शुरू करी गई मुख्य ब्रांच आज अपनी 106 वी वर्षगांठ मना रही है। संस्था में पढ़े हुए लाखों छात्र देश दुनिया के हर कोने में प्रत्येक क्षेत्र में एक मुकम्मल नागरिक के तौर पर अपना लोकतांत्रिक कर्तव्य निभा रहे हैं।

1990 केंद्र सरकार की ओर से खुली अर्थव्यवस्था की निति स्वीकारने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर किए गए बदलावों को अपनाकर संस्था ने अपने छात्रों को उस तरह से तैयार किया। तब से अब तक के चार दशकों में अलग अलग सरकारों की नीतियों के कारण बना कुछ और बिगड़ा अधिक। भावुकता की राजनीति द्वारा रचे “बेरोजगारी” के चक्रव्यूह ने आज के युवक को अभिमन्यु बना दिया है।

सोचिए देश के ऐसे हजारों शहरों की कानून व्यवस्था कैसी होगी ? कई जगहों पर तो सत्ता में बैठे नेताओं के वर्चस्ववादी अहंकार ने शिक्षा संस्थाओं की गरिमा , गुणवत्ता , विद्वत्ता को रौंद डाला है। NCRB के मुताबिक 50 हजार की आबादी वाले जामनेर का अपराध दर शून्य है। जामनेर तालुका एजुकेशन सोसायटी संचालित इकाइयों के अनुशासन में पला – बढ़ा , पढ़ा – लिखा हर एक छात्र अपनी विवेचना की लड़ाई उस विवेक के बलबूते लड़ रहा है जिसे संस्था से मिले संस्कारों ने विकसित किया है।

