रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ इस बार रक्षाबंधन का त्योहार पिछले कुछ वर्ष की भांति फिर दो दिन मनाया जाएगा।
भाईयों को राखी बंधवाने के लिए एवं बहनों को राखी बांधने के लिए लंबी अवधि का इंतज़ार करना पड़ेगा।
सर्व श्रेष्ठ मुहूर्त भी दो घंटे तीन मिनट का रहेगा क्योंकि रक्षाबंधन के तिथि के दिन ही सुबह से ही भद्रा लग जा रहा है। इसलिए इस बार रक्षाबंधन का त्योहार 30 अगस्त या 31 अगस्त को मनाया जाए, इसे लेकर संशय की स्थिति निर्मित हो रही है।
30 अगस्त सुबह 10:13 से पूर्णिमा तिथि लग रही है जो 31 अगस्त सुबह 7:46 तक रहेगी। पौराणिक नियम अनुसार इस अवधि में रक्षाबंधन का त्योहार मनता है लेकिन जैसे ही 30 अगस्त को पूर्णिमा तिथि चढ़ रही है, वैसे ही भद्रा सुबह 10:13 से लगने जा रहा है जो रात 8:57 तक रहेगा, इसलिए 30 अगस्त सुबह से लेकर रात्रि 8:57 तक बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षाबंधन नहीं बांध सकेंगी।
इन तीन सर्व श्रेष्ठ मुहूर्त में बहनें, भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं
30 अगस्त को पूर्णिमा तिथि से लेकर रात्रि 8:57 तक भद्रा काल रहेगा, जो रक्षाबंधन के लिए सर्वत्र वर्जित है, इसलिए रक्षाबंधन मुहूर्त के हिसाब से ही करें। प्रथम सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 31 अगस्त की सुबह 5:53 से लेकर सुबह 7:46 तक रहेगा। द्वितीय सर्वश्रेष्ठ 30 अगस्त को रात्रि 8:57 से लेकर मध्य रात्रि 12 बजे तक रहेगा। तृतीय सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 31 अगस्त की सुबह 7:46 से लेकर सायं 6:17 तक रहेगी।
इन तीन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में बहनें अपनी सुविधा अनुसार भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। बताए मुहूर्त अनुसार 31अगस्त को दिनभर रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जा सकता है, इसमें किसी प्रकार का अनिष्ठ एवं संदेह की स्थिति नहीं है।
पंडित नरेश शर्मा ने बताया कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधने के कारण के पीछे पौराणिक कथा है।
त्योहार मनाने के पीछे ये है पैराणिक कथा
पंडित नरेश शर्मा ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार असुरों के राजा बलि ने सैकड़ों यज्ञ करने के बाद शक्ति शाली होकर देवराज इंद्र के इंद्रासन पर हमला बोल दिया।
इससे देवराज इंद्र की पत्नी घबरा गई और रक्षा के लिए भगवान विष्णु के पास गई। भगवान विष्णु रक्षा का वचन देकर वामन अवतार में राजा बलि के पास जाते हैं।
यहां वे राजा बलि से तीन पग जमीन मांगते हैं, दो पग जमीन देने के बाद तीसरा पग राजा बलि अपने सिर पर रखवाते हैं, इसी दौरान राजा बलि को ज्ञान हो जाता है कि यह सामान्य पुरूष नहीं बल्कि भगवान नारायण हैं। तब भगवान बोलते हैं हम तुम पर प्रसन्न हैं जो मांगना चाहते हो मांगो। तब राजा बलि भगवान से कहते हैं आप हमारे दरबार के पहरेदार बनिए, भगवान तथास्तु कहकर दरबार में पहरेदार बन जाते हैं।
इधर बहुत दिन बाद भी भगवान विष्णु वापस नहीं लौटते है तो उनकी पत्नी लक्ष्मी व्याकुल हो जाती हैं और राजा बलि के पास पहुंचती है। यहां राजा बलि को भाई बनाकर रक्षा सूत्र बांधती हैं और बदले में अपने पति भगवान विष्णु को मांगकर वापस लेकर जाती हैं। जिस दिन यह हुआ उसी दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी, तब से लेकर आज तक रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है।
मुहूर्त को लेकर के लोगों में काफी संशय की स्थिति: पण्डित नरेश शर्मा
श्री त्रिताप हरेश्वर महादेव मंदिर अमरपुरा अनास कोठी के पूजारी-पंडित नरेश शर्मा ने इस विषय में बताया कि इस बार रक्षाबंधन की पूर्णिमा तिथि के दिन भद्रा काल लगने से मुहूर्त को लेकर के लोगों में काफी संशय की स्थिति है कि राखी का त्योहार किस दिन मनाया जाए।
