पर्यावरण संवर्धन के लिए पारंपरिक जैविक खेती और भारतीय बीजों का संरक्षण जरूरी, शांतिधारा में भारतीय बीज और जैविक खेती पर कार्यशाला संपन्न | New India Times

त्रिवेंद्र जाट, देवरी/सागर (मप्र), NIT:

पर्यावरण संवर्धन के लिए पारंपरिक जैविक खेती और भारतीय बीजों का संरक्षण जरूरी, शांतिधारा में भारतीय बीज और जैविक खेती पर कार्यशाला संपन्न | New India Times

पर्यावरणीय खतरे, बढ़ती बीमारियों एवं भूमि के बदलते मिजाज की चिंताओं को रेखांकित करते हुए शांतिधारा अतिशय क्षेत्र बीना जी बारहा में अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष के उपलक्ष्य में भारतीय बीज एवं जैविक खेती पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें देश के विभिन्न स्थानों से आये कृषि विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम में एकत्र हुए सैकड़ों कृषकों ने भारतीय बीजों के अधिकतम उपयोग उनके संरक्षण एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

शांतिधाम अतिशय क्षेत्र बीना जी बारहा में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद से पल्लवित
शांतिधारा दुग्ध योजना एवं कृषि अनुसंधान केन्द्र में जैन मुनि श्री संभव सागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में दो दिवसीय कार्यशाला एवं कृषक सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें कृषि के विभिन्न क्षेत्रों से आये विशेषज्ञों एवं विद्धानों ने अपने अपने विचार व्यक्त कर उपस्थित कृषक समुदाय को जैविक कृषि की तकनीक एवं प्रकृति प्रदत्त बीजों की लाभदायक उपयोगी किस्मों की जानकारी दी। कार्यक्रम में कृषकों को जैविक कृषि की कम लागत वाली पद्धतियों, अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों एवं जैविक उत्पादों के विक्रय के लिए उपलब्ध बाजार की जानकारी दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश गौ संवर्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष स्वामी अखिलेश्वर आनंद गिरी ने कहा कि भारतीय जैविक कृषि पद्धति, भारतीय बीज एवं भारत की परंपरागत कृषि विधि को पुर्नस्थापित करना प्रकृति एवं समाज दोनो की जरूरत है। उन्होने बताया कि विश्वमंगल गौग्राम यात्रा में यह तथ्य सामने आया था कि भारतीय गायों की नस्ल ही बिगाड़ दी गई है यह अंधनुकरण का परिणाम था। यह देश आदिकाल से भारतीय गायों का स्वाभाव और महत्व से परिचित है पर आज उसे संचित करने की आवश्यकता है।
हमारे वेदों में वर्णित है गौ विश्वस्य मातरः गाय पूरे विश्व की माता है तो हमारा प्रयास होना चाहिए कि सारे विश्व में गायो का सम्मान होना हो, गाय भागौलिक सीमा में न समेटकर पूरे विश्व में स्थापित करने की आवश्यकता है। गंगा और नर्मदा और हिमालय जीवांत ईकाई है तो गाय तो जीवत है ही इसके लिए संवैधानिक व्यवस्था होनी चाहिए। हमने अनेकता का मॉडल स्वीकार किया है जिसके दुष्परिणम हमारे सामने है। प्राकृतिक खेती का उत्पादन कम हो सकता है परंतु उसकी गुणवत्ता प्रमाणित है, रासायनिक खाद से उपज बढ़ रही है परंतु वह जहर है वह धरती की क्षमताओं को क्षीण कर रही है, मानव शरीर और जमीन दोनो पर प्रतिकूल प्रभाव पड़
रहा है। धरती की भूख और प्यास पर चिंतन आवश्यक है। कार्यशाला को संबोधित करते हुए पद्यश्री बाबूलाल दाहिया ने कहा कि जो बीज प्रकृति में हजारों वर्षा से रचे बसे है यह प्रकृति के अपने नैसर्गिक अनुसंधान का परिणाम है उन्हें बचाना आवश्यक है। आज प्रयोगशालाओं जो बीज निर्माण हो रहे हैं वह इन्हीं बीजों के गुणों में परिवर्तन का परिणाम है। प्रकृति में जो बीज पैदा हुए वह उस परिवेश की वर्षा पर आधारित थे उनका तना मोटा था वह वर्षा का जल संचित करने में सक्षम थे, उनमें निंदाई की समस्या नहीं थी परंतु आज कृषक नये बीजों के प्रयोग के कारण कृषि की बढ़ती लागतों से जूझ रहा है। उन्होंने बताया कि उनके पास धान के 200 प्रकार के बीज एवं गेहूं के 18 प्रकार के बीज हैं उन्हें कृषको उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि उनका प्रसार एवं संचय हो। उन्होने कृषको से कहा कि वह अपने अपने क्षेत्र में बीजों को बचाने का प्रयास करे। उन्होने बताया कि
वह शांतिधारा संस्थान को 25 प्रकार के बीज उपलब्ध करायेंगे। उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का उपयोग
प्रकृति के विपरीत है यदि प्रकृति के सिस्टम से खिलवाड़ होगा तो उसके दुष्परिणाम सामने आयेंगे, प्रकृति से खिलवाड़ विनाश का कारण है। उन्होने कहा कि जैविक खेती को लेकर शांतिधारा में हो रहे प्रयास सराहनीय है इससे
पानी बचेगा, भूमि सुरक्षित रहेगी और लोगों को गुणवत्ता युक्त उत्पाद मिलेंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते कृषि विशेषज्ञ राजेन्द्र सिंह राठौर रतलाम ने बताया कि किस प्रकार बिना रासायनिक
खाद एवं बिना सिंचाई के किस प्रकार कृषि से उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होने बताया कि जैविक खेती
भी बढ़ती आबादी की जरूरतों को पूरा कर सकती है, आज हमारे गोदामों में इतना अनाज है कि यदि हम बोरियो
की मीनार बनाये तो चांद पर पहुँच जायेंगे, परंतु खाद्यान प्राकृतिक रूप से कैसे सुरक्षित होगा इस पर हमारा चिंतन
नही है। रासायनिक खादों से उगाये गये खाद्यान में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है जिसके कारण कीट व्याधि
एवं अन्य बीमारिया फैलती है जो कृषकों की लागत बढ़ाती और पौधे की सेहत को खराब करती है। इनके भंडारण
के बाद भी इन्हे सुरक्षित रखना चुनौती है, यह शीघ्र नष्ट हो जाते है जबकि प्राकृतिक रूप से उगने वाली फसलों के
बीज प्रकृति में लंबे समय तक पड़े रहे है परंतु न तो उनकी अंकुरण क्षमता कम होती है न ही वह नष्ट होते है।
आज ऐसे कृषि उत्पाद पैदा किये जा रहे हैं जिनको खाकर लोग बीमार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि आज गुणवत्ता
युक्त खाद्यान बड़ी चुनौती है, प्रकृति ने लाखों वर्षों के शोध से बीज की हजारों लाखों किस्मे पैदा की थी जिन्हें संचित
रखना हमारी चुनौती है। वर्तमान समय उत्पादन नहीं गुणवत्ता चुनौती है हम प्रकृति की विविधता को समझें और उसके अनुरूप फसलों का चयन करें, उत्पादन नहीं गुणवत्ता पर चिंतन करें।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विशेषज्ञ आकाश चौरसिया सागर ने कहा कि जैविक कृषि के माध्यम से
वह सैकड़ों लोगों को जहर मुक्त खाना खिला रहे हैं, यदि इसका विस्तार होगा तो लाखों लोगों को इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि वह किस प्रकार छोटे से भूमि के टुकड़े में नवीन तकनीकी का प्रयोग कर जैविक माध्यमों से अधिक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। मल्टी लेयर फार्मिंग वह व्यवस्था है जिससे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि देश एवं विदेशों में इस पर कार्य चल रहा है। देश में 2 से 3 हजार मॉडल स्थापित किये गये हैं। शहर में घटती भूमि को ध्यान में रखकर 4 एवं 5 लेयर फार्मिंग की जा सकती है, यह पौधों की धूप की आवश्कता पर आधारित है।

कार्यक्रम को कृषि विशेषज्ञ राहुल रसल अहमदनगर, ऑर्गेनिक फार्मिंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सचिव
रोहित जैन उदयपुर एवं जैविक कृषि विशेषज्ञ प्रतीक शर्मा भोपाल, अभितेन्द्र मिश्रा ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में उच्च शिक्षित कृषक एवं आईटी के जानकार मनीष पटैल द्वारा निर्मित कराये गये ड्रोन से खेतों में
जैविक दवाओं के छिड़काव का प्रदर्शन किया गया। उन्होने बताया कि उक्त ड्रोन उनके द्वारा कृषकों की आवश्कताओं
को ध्यान में रखकर बनाया गया है जिसकी लागत बाजार से बहुत कम है। इस अवसर पर आयोजक समिति अध्यक्ष अलकेश जैन एवं पदाधिकारियों द्वारा अतिथियों एवं जैविक कृषि कर रहे कृषकों को स्मृति चिन्ह भेंट किये गये। कार्यक्रम का संचालन ब्रम्हचारी अमित भैया एवं मनीष भैया द्वारा किया गया एवं आभार प्रदर्शन क्षेत्र कमेटी के महामंत्री अजय जैन पारस द्वारा किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक हर्ष यादव, पूर्व विघायक डॉ. भानु राणा, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मयंक चौरसिया, प्रीतम सिंह राजपूत, विनीत जैन, अमित कुदपुरा, राजू बारहा, अभय भौरझिर सहित क्षेत्र कमेटी के पदाधिकारी एवं सैकड़ों कृषक उपस्थित थे।

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