अबरार अहमद खान, भोपाल, NIT; 
एलबीएस अस्पताल के डॉ राम देशमुख ने एक मुस्लिम परिवार की सहायता कर इंसानियत की मिसाल कायम की है।रेलवे स्टेशन पर प्रसव पीड़ा से तड़पती नाजिया को अपनी निजी कार से अस्पताल पहुंचाकर नई जिंदगी दी। उनकी तत्परता और सूझबूझ की जितनी तारीफ की जाए उतनी कम है।
मिली जानकारी के मुताबिक भोपाल रेलवे स्टेशन पर तिरुपति एक्सप्रेस से जब रेलवे कर्मी, गोरखपुर के मुस्लिम परिवार के सदस्य बदहवास स्थिति में नाजिया को लेकर प्लेटफार्म पर उतरते हैं। तब वहां रेलवे के बेबस डाक्टर बिना किसी मेडिकल एड के पहुँचते हैं। प्रसव पीड़ा से तड़पती नाजिया का तमाशा बन जाता है, उसके परिजन हताश और लाचार किसी खाली बेंच की तलाश करते हैं। तभी उनकी मदद के लिए आगे आते हैं पत्रकार सुमित वर्मा और प्रवेश श्रीवास्तव। ये दोनों पत्रकार हैदराबाद जाने के लिए प्लेटफार्म 1 पर गाड़ी का इंतजार कर रहे थे।
सुमित वर्मा रामोजी फिल्म सिटी के मीडिया मेनेजर नार्थ इंडिया भी हैं। उन्होंने पहले 108 और फिर जननी एक्सप्रेस के लिए कोशिश की, लेकिन कोई रिस्पोंस नहीं मिला। इसके बाद रेलवे हॉस्पिटल ने भी तुरंत सहायता नहीं दी। इधर नजमा की हालत और बिगड़ रही थी। रेलवे प्लेटफार्म पर उसे भीड़ और टैक्सी-ऑटो वालों का जमघट देख रहा था। ऐसे में सुमित वर्मा ने डॉ राम को सूचित किया, तब दिन भर अस्पताल में मरीजों की सेवा कर घर लौट कर खाना खाने ही बैठे थे। सुमित वर्मा ने जब उन्हें परिस्थिति समझाई तो वे खाना छोड़ कर रेलवे स्टेशन आये। वे अपनी कार से नाजिया और उसके परिजनों को अस्पताल ले गए। खुशखबरी है कि नाजिया को नार्मल डिलेवरी हुई और बेटे ने जन्म लिया। उसके परिजन डॉ राम को अल्लाह का भेजा हुआ बंदा कह रहे हैं। इधर नाजिया ने कहा कि वो भोपाल के युवकों डॉ राम, सुमित वर्मा और प्रवेश श्रीवास्तव की जिन्दगी भर शुक्रगुजार रहेंगी। उनके लिए दुआ करती रहेंगी।
