ज़फ़र खान, अकोट/अकोला (महाराष्ट्र), NIT:
अकोट सत्र न्यायालय ने 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी शैलेश अरुण वाघोडे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर कुल 71 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस मामले में सरकारी वकील एडवोकेट अजीत देशमुख की प्रभावी पैरवी और मजबूत दलीलें महत्वपूर्ण रहीं।
अकोट के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बी.एम. पाटील ने 5 नवंबर 2026 को दहीहांडा पुलिस स्टेशन में दर्ज अपराध क्रमांक 372/2023 में यह फैसला सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार, 25 दिसंबर 2023 की रात करीब 8 से 8:30 बजे के बीच आरोपी शैलेश अरुण वाघोडे (38), निवासी पाटसूल, तहसील अकोट, जिला अकोला, पीड़िता के घर में घुस गया। घर के दोनों दरवाजे बंद कर उसने 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला का सिर दीवार पर पटक दिया और उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।
आरोपी ने पीड़िता को अपमानित करने वाले शब्द कहे और घटना किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। पीड़िता की शिकायत के आधार पर दहीहांडा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
सरकारी वकील अजीत देशमुख की प्रभावी पैरवी
इस संवेदनशील मामले में सरकार की ओर से सरकारी वकील एडवोकेट अजीत देशमुख ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने न्यायालय में कुल सात गवाहों के बयान दर्ज करवाए। इनमें 82 वर्षीय पीड़िता, मेडिकल ऑफिसर और जांच अधिकारी PSI अरुण मुंढे की गवाही विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही।
सजा पर बहस के दौरान एडवोकेट अजीत देशमुख ने अदालत के समक्ष दलील दी कि आरोपी ने अपनी मां की उम्र की 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला के साथ जघन्य अपराध किया है। ऐसे गंभीर अपराध में नरमी बरतने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। इसलिए आरोपी को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।
सरकारी पक्ष की दलीलों और प्रस्तुत साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपी को कठोर सजा सुनाई।
अदालत ने सुनाई ये सजाएं
- भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत आजीवन कारावास और 50,000 रुपये जुर्माना।
- धारा 452 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 10,000 रुपये जुर्माना।
- धारा 323 के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1,000 रुपये जुर्माना।
- धारा 506 के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 10,000 रुपये जुर्माना।
इस प्रकार अदालत ने आरोपी पर कुल 71,000 रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही जुर्माने की राशि अपील की अवधि समाप्त होने के बाद पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।
पुलिस और पैरवी टीम का रहा महत्वपूर्ण योगदान
मामले की जांच तत्कालीन दहीहांडा पुलिस स्टेशन के PSI अरुण मुंढे ने की और आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अकोला अर्चित चांडक, अकोट उपविभागीय पुलिस अधिकारी निखिल पाटील तथा दहीहांडा पुलिस स्टेशन के थानेदार गोपाल ढोले के मार्गदर्शन में आगे बढ़ी।
पैरवी अधिकारी के रूप में पुलिस हेड कांस्टेबल दिनेश काळे (बकल नंबर 528) और पुलिस हेड कांस्टेबल महेंद्र काळे (बकल नंबर 691) ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
एडवोकेट अजीत देशमुख की पैरवी की सराहना
इस पूरे मामले में सरकारी वकील एडवोकेट अजीत देशमुख ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। सजा के समय कठोर दंड की मांग करते हुए उन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अकोट सत्र न्यायालय के इस फैसले से यह संदेश गया है कि बुजुर्ग महिलाओं के साथ होने वाले जघन्य अपराधों में कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

