मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
प्रदेश सरकार द्वारा महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति धारकों को उनकी संपत्तियों के वैधानिक अधिकार और स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इस योजना को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने का दबाव मैदानी अमले पर है। जुन्नारदेव तहसील में राजस्व निरीक्षकों (आरआई) की भारी कमी के चलते इस अभियान के क्रियान्वयन सहित अन्य राजस्व कार्यों पर भी असर पड़ रहा है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, जुन्नारदेव तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई राजस्व सर्किल लंबे समय से आरआई विहीन हैं, जबकि सीमित संख्या में राजस्व निरीक्षकों के कंधों पर पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी है। सीमित संसाधनों और कर्मचारियों की कमी के कारण एक ओर जहां शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाइयां आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर पटवारी अतिरिक्त मानसिक दबाव और तनाव के बीच कार्य करने को मजबूर हैं।
पटवारियों पर बढ़ा काम का दोहरा बोझ
स्थानीय पटवारियों और मैदानी अमले ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरआई की कमी के चलते ‘स्वामित्व योजना’ के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण विभागीय कार्यों का निर्वहन करना भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। पटवारियों पर नियमित, तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
स्वामित्व योजना एवं व्यावहारिक कठिनाइयां: स्वामित्व योजना के तहत घर-घर जाकर संपत्ति धारकों का सत्यापन और आवश्यक दस्तावेज तैयार करने का कार्य किया जा रहा है। मैदानी स्तर पर घर-घर संपर्क के दौरान संपत्ति धारकों का मौके पर उपलब्ध न होना, दस्तावेजों में आधार कार्ड से संबंधित त्रुटियां और ई-केवाईसी की प्रक्रिया अधूरी रहना बड़ी बाधाएं बन रही हैं।
अतिक्रमण हटाने एवं सीमांकन की कार्रवाई: शासकीय जमीनों से अतिक्रमण हटाने, कब्जा दिलाने तथा भूमि सीमांकन जैसे संवेदनशील मामलों में राजस्व निरीक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आरआई की कमी के कारण इन प्रक्रियाओं में देरी हो रही है, जिससे पटवारियों पर आम जनता का सीधा दबाव बढ़ रहा है।
रास्ता विवाद के बढ़ते मामले: ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों और मकानों तक आवागमन के रास्तों को लेकर विवाद के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। आरआई की कमी के कारण मौका निरीक्षण और प्रशासनिक प्रतिवेदन समय पर तैयार करने में परेशानी हो रही है, जिससे विवादों के समाधान में देरी हो रही है।
फार्मर रजिस्ट्री का दबाव: किसानों की फार्मर रजिस्ट्री के तहत डेटा प्रविष्टि, आधार लिंकिंग और खसरा मैपिंग का कार्य भी पटवारियों की जिम्मेदारी में शामिल है। सर्वर डाउन रहने और तकनीकी खामियों के चलते इस कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
फसल गिरदावरी एवं फसल कटाई प्रयोग: कृषि उत्पादन के सटीक आकलन, फसल बीमा और आपदा राहत के लिए फसल गिरदावरी तथा फसल कटाई प्रयोग (क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट) का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। पर्याप्त राजस्व अमले की कमी और मार्गदर्शन एवं निगरानी संबंधी चुनौतियों के कारण निर्धारित समय पर इन कार्यों को पूरा करने में मैदानी कर्मचारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
अतिरिक्त मानसिक दबाव: इन तमाम तकनीकी, प्रशासनिक और मैदानी चुनौतियों के बीच निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करने के दबाव ने पटवारियों पर मानसिक और शारीरिक बोझ बढ़ा दिया है।
प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप की उम्मीद
शासन की ‘स्वामित्व योजना’ तथा कृषि एवं राजस्व विभाग की अन्य योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को संपत्ति संबंधी अधिकार उपलब्ध कराना और भूमि एवं सीमा विवादों का समाधान करना है। लेकिन जब राजस्व निरीक्षकों के पद रिक्त हों और सीमित अधिकारियों के पास पूरे क्षेत्र की जिम्मेदारी हो, तो इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ मैदानी अमले और आम जनता पर भी पड़ता है।
क्षेत्रीय निवासियों और पटवारी संघ ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जुन्नारदेव तहसील में जल्द से जल्द पर्याप्त संख्या में राजस्व निरीक्षकों (आरआई) की पदस्थापना की जाए, ताकि शासकीय योजनाओं का सुचारू रूप से क्रियान्वयन हो सके और मैदानी कर्मचारियों को काम के अतिरिक्त दबाव से राहत मिल सके।
वहीं, मामले को लेकर तहसील प्रशासन ने भी आम जनता से सहयोग करने की अपील की है।

