वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

ग्रामीणों की सुविधा के लिए लाखों रुपये की सरकारी धनराशि खर्च कर बनाए गए सार्वजनिक भवन किस तरह प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी का शिकार हो जाते हैं, इसका उदाहरण ग्राम पंचायत खखरा में देखने को मिल रहा है। यहां निर्मित सरकारी बारात घर लंबे समय से बदहाली का शिकार है और ग्रामीणों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
बारात घर की स्थिति बेहद दयनीय हो चुकी है। भवन के अंदर गंदगी और कूड़े-कचरे का अंबार लगा हुआ है। फर्श पर फैली गंदगी और दीवारों की जर्जर हालत भवन के रखरखाव की पोल खोल रही है। वहीं, परिसर के चारों ओर जंगली झाड़ियां और घास-फूस उग आई हैं, जिससे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस बारात घर का निर्माण सामूहिक और पारिवारिक आयोजनों की सुविधा के लिए कराया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में यह भवन अनुपयोगी होता जा रहा है। यहां न तो बिजली की समुचित व्यवस्था है और न ही पीने के स्वच्छ पानी की सुविधा उपलब्ध है। शौचालय भी क्रियाशील स्थिति में नहीं हैं। इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को अपने पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए महंगे निजी मैरिज हॉल का सहारा लेना पड़ रहा है।
बारात घर की बदहाल स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सार्वजनिक भवन की नियमित साफ-सफाई और देखरेख की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन से निर्मित इस सुविधा का लाभ आम जनता को मिल सके।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि बारात घर की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, परिसर में उगी झाड़ियों को हटवाया जाए तथा बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त कर भवन को दोबारा उपयोग के योग्य बनाया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल सरकारी भवन नहीं, बल्कि उस सुविधा की जरूरत है जिसके उद्देश्य से इसका निर्माण कराया गया था। अब देखना यह है कि प्रशासन इस समस्या पर कब संज्ञान लेता है और बारात घर की बदहाली दूर करने के लिए कब ठोस कदम उठाता है।

