जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
राजधानी के बरखेड़ी (थाना जहांगीराबाद) इलाके में धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। खुद को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का कर्मचारी बताकर एक शातिर जालसाज ने गरीब बस्तियों में रहने वाले लोगों, बेसहारा महिलाओं और विधवाओं को अपना शिकार बनाया। आरोपी ने सुरक्षित भविष्य के लिए पाई-पाई जोड़कर जमा की गई उनकी मेहनत की कमाई के बदले फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) रसीदें थमा दीं और लाखों-करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गया।
शातिर दिमाग से रचा फर्जीवाड़े का पूरा खेल
आरोपी साद खान (निवासी: 11, कृष्ण निवास, बरखेड़ी) ने गरीब तबके के लोगों को 7.5 प्रतिशत ब्याज दिलाने का लालच दिया। महिलाओं का भरोसा जीतने के लिए उसने कंप्यूटर की मदद से भारतीय स्टेट बैंक के लेटरहेड, लोगो और डिजाइन से मिलती-जुलती फर्जी ‘e-Special Term Deposit Advice’ तैयार की। आरोप है कि जालसाज ने इंटरनेट बैंकिंग की पुरानी रसीदों में बदलाव कर उनमें फर्जी खाता नंबर और तारीखें दर्ज कीं और उन्हें प्रिंट कर पीड़ितों को दे दिया।
बैंक पहुंचने पर खुला फर्जीवाड़ा, पीड़ितों के उड़े होश
इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ, जब पीड़िता समरीन खान (निवासी: 61, जवाहर कॉलोनी, ऐशबाग) अपनी एक लाख रुपये की जमा राशि की मैच्योरिटी पूरी होने पर बरखेड़ी शाखा पहुंचीं। बैंक अधिकारियों ने जब उनकी FD रसीद की जांच की तो पता चला कि बैंक के रिकॉर्ड में न तो संबंधित खाता मौजूद है और न ही कोई रकम जमा की गई है।
इसके बाद मामले की पड़ताल में सामने आया कि इलाके की लगभग 30 से 35 गरीब और विधवा महिलाएं इस जालसाज का शिकार हो चुकी हैं। आरोप है कि ठग उनकी वर्षों की जमा पूंजी लेकर फरार हो गया।
आरोपी की गिरफ्तारी और संपत्ति जब्त कर पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग
इस मामले में जहांगीराबाद थाने में आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत देकर सख्त कानूनी कार्रवाई और प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है। क्षेत्रवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि बेसहारा और जरूरतमंद परिवारों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
लोगों ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच क्राइम ब्रांच या आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) को सौंपी जाए। साथ ही आरोपी के बैंक खातों की जांच कर आवश्यकतानुसार उन्हें फ्रीज किया जाए, उसके संभावित ठिकानों पर दबिश देकर जल्द गिरफ्तार किया जाए तथा कानून के अनुसार उसकी संपत्ति कुर्क कर पीड़ितों की रकम वापस दिलाने की कार्रवाई की जाए।

