वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:
पति-पत्नी के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक करवा चौथ का पावन पर्व गुरुवार को जिलेभर में हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। जिले के सदर, गोला, निघासन, पलिया और बिजुआ सहित शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं ने विधि-विधान से माता करवा और भगवान शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की।
सुबह से ही जिलेभर के घरों में उत्सव का माहौल देखने को मिला। सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु, सुखी दांपत्य जीवन और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ दिनभर निर्जला उपवास रखा। शाम को महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर पूजा-अर्चना की और रात में चंद्रदेव को अर्घ्य देकर अपना व्रत पूर्ण किया।
त्योहार को लेकर लखीमपुर शहर के मेला मैदान, संकटा देवी रोड, निघासन रोड और बिजुआ कस्बे के चमन चौराहे सहित प्रमुख बाजारों में रौनक देखते ही बन रही थी। कॉस्मेटिक सामान, पारंपरिक साड़ियों, लहंगों, सोने-चांदी के आभूषणों और पूजा सामग्री की दुकानों पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। मिट्टी के विशेष करवे और दीपकों की दुकानों पर भी जमकर खरीदारी हुई। ब्यूटी पार्लरों में महिलाओं को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा, वहीं मेहंदी लगाने वाले कलाकारों के पास देर रात तक महिलाओं की भीड़ लगी रही।
आधुनिकता के इस दौर में भी लखीमपुर के ग्रामीण अंचलों, जैसे बिझौली और हिकमतनगर में लोक परंपराओं के सुंदर रंग देखने को मिले। ग्रामीण महिलाओं ने अपने घरों की दीवारों को साफ कर उन पर गेरू और चावल के ऐपन से पारंपरिक चित्रकारी की। इन चित्रों में माता करवा, भगवान शिव-पार्वती, गणेश जी, सूर्य और चंद्रमा की आकृतियां उकेरी गईं, जो सुहाग की मंगलकामना और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि का प्रतीक हैं।
शाम के शुभ मुहूर्त में महिलाएं सोलह श्रृंगार कर लाल और चटक रंगों की खूबसूरत साड़ियों में सजी-धजी नजर आईं। शहर से लेकर गांवों तक कई स्थानों पर सामूहिक पूजा का आयोजन किया गया। महिलाओं ने एक साथ बैठकर करवा माता की पारंपरिक कथा सुनी और एक-दूसरे को करवे बदलकर पर्व की रस्में निभाईं। इस दौरान पारंपरिक गीतों और भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
रात करीब 7:57 बजे जैसे ही बादलों की ओट से चंद्रमा दिखाई दिया, महिलाओं के चेहरे खिल उठे। व्रती महिलाओं ने छतों और आंगनों में जाकर छलनी के माध्यम से पहले दीपक की लौ और फिर चंद्रदेव के दर्शन किए। इसके बाद चंद्रमा को जल का अर्घ्य अर्पित किया और छलनी से अपने पति का चेहरा देखा। पतियों ने अपनी पत्नियों को पानी पिलाकर और मिठाई खिलाकर उनका निर्जला व्रत खुलवाया। वहीं, पतियों ने भी अपनी जीवनसंगिनियों को सुंदर उपहार भेंट कर इस खास दिन को यादगार बनाया।
इस वर्ष करवा चौथ पर विशेष ज्योतिषीय योगों के चलते महिलाओं में पूजा-अर्चना को लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली। पूरे जिले में पारंपरिक आस्था, प्रेम और उल्लास के साथ मनाए गए इस पर्व ने पारिवारिक रिश्तों की मिठास और सांस्कृतिक परंपराओं की खूबसूरती को एक बार फिर जीवंत कर दिया।

