संदीप शुक्ला, ब्यूरो चीफ, ग्वालियर (मप्र), NIT:

21वें आईटीएम उद्भव उत्सव इंटरनेशनल कल्चरल ओलंपियाड के अंतिम दिन सोमवार को एकल और समूह नृत्य की शानदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से राधा-कृष्ण की रासलीला, हनुमान की रामभक्ति, भगवान शिव के त्रिनेत्रधारी रौद्र स्वरूप और भगवान जगन्नाथ की स्तुति को जीवंत कर दिया। शास्त्रीय और अर्धशास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति, भक्ति और पौराणिक प्रसंगों की झलक देखने को मिली।

आईटीएम यूनिवर्सिटी, तुरारी में सुबह 10 बजे से आयोजित एकल नृत्य के फाइनल राउंड में प्रतिभागियों ने अपनी कला और भाव-भंगिमाओं से निर्णायकों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं, शाम को सिथौली स्थित आईटीएम परिसर के खुले मंच ‘नाद’ पर रंग-बिरंगी रोशनी के बीच समूह नृत्य की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।

कलाकारों ने नृत्य से जीवंत किए पौराणिक प्रसंग
एकल नृत्य में गुरुग्राम की आयशा खट्टर ने फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ के प्रसिद्ध गीत ‘जब प्यार किया तो डरना क्या’ पर आकर्षक प्रस्तुति दी। ग्वालियर की वाणी पाठक ने ‘ठाढ़े रहियो ओ बांके यार’ पर नृत्य से दर्शकों को प्रभावित किया। गुरुग्राम के अर्नव अजाना ने ‘डिवाइन पावर’ और ‘ओम नमः शिवाय’ की प्रस्तुति में भाव-भंगिमाओं और लयबद्धता का शानदार प्रदर्शन किया। आगरा की अनायशा स्वायने ने ‘मोहित छेड़ो ना मुझको’ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।

हरियाणा के सोनीपत से आए सप्त ऋषि टीवी ने नटराज नृत्य से वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जबकि ग्वालियर की फाल्गुनी कसेरा ने शास्त्रीय नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। गुरुग्राम की सोफिया बुरतों ने शिव महिमा पर आधारित प्रस्तुति दी। कानपुर के ईशान पांडे ने ‘रघुवर तेरी राह निहारे सातों जन्म में पिया’ पर दर्शकों की सराहना हासिल की।
गुवाहाटी की रेनाइस्ता जैन ने राधा-कृष्ण की रासलीला को भावप्रधान नृत्य में पिरोया। गुरुग्राम की गिरिका नागपाल ने नृत्य के माध्यम से कृष्ण के नटखट स्वरूप से लेकर योद्धा रूप तक की यात्रा को मंच पर उतारा, जबकि इंदौर की स्वर्णिम नेमा ने कृष्ण-अर्जुन संवाद को नृत्य-अभिनय के माध्यम से सजीव किया। गुरुग्राम की दिया सोनी ने सावन और विरह के भावों को अर्धशास्त्रीय शैली में प्रस्तुत किया। अहाना चौहान ने ‘इन मधुबन में कन्हैया बोल’ के जरिए राधा के मनोभावों को अभिव्यक्त किया।
गुरुग्राम के दश पुरी ने ‘लॉर्ड कृष्ण कौन हैं’ विषय पर अपनी प्रस्तुति दी। स्वस्ति सोमानी ने कबीर के प्रसिद्ध भजन ‘चदरिया झीनी रे झीनी’ पर भावपूर्ण नृत्य किया, जबकि सैन अग्रवाल ने ‘बरसो रे मेघा मेघा’ के माध्यम से वर्षा और प्रकृति के सौंदर्य को मंच पर साकार किया। ग्वालियर की धानवी तोड़ी ने ‘तेरी काली अंखियों से जिंद मेरी जागे’ गीत पर नृत्य-अभिनय से दर्शकों का मन मोह लिया।
समूह नृत्य में दिखी शास्त्रीय कला की छटा
शाम को सिथौली स्थित आईटीएम परिसर के खुले मंच ‘नाद’ पर समूह नृत्य की प्रस्तुतियां आयोजित की गईं। कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन के समूह ने भगवान जगन्नाथ की स्तुति प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद इंदौर के डेली कॉलेज के कलाकारों ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) के विद्यार्थियों ने मेघनाद प्रसंग को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया, जबकि सिंधिया कन्या विद्यालय, ग्वालियर की छात्राओं ने ‘नटनम’ की प्रस्तुति दी।
ओपन क्लासिकल डांस श्रेणी में इंदौर की आयाम कथक अकादमी ने शिव वंदना प्रस्तुत की। इसके बाद कल्पार्पण डांस एकेडमी और स्वर्णा डांस एकेडमी के कलाकारों ने समूह नृत्य के जरिए दर्शकों की सराहना बटोरी। अंत में ए.के.एस. एकेडमी की कथक प्रस्तुति पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं।
संस्कृति के माध्यम से मजबूत होता है वैश्विक संवाद
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी, पीवीएसएम, एवीएसएम, एनएम और उनकी पत्नी श्रीमती शशि त्रिपाठी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात कथक नृत्यांगना पद्मश्री डॉ. नलिनी-कमलिनी ने की। विशेष अतिथियों में सिंधिया कन्या विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती निशि मिश्रा, आईटीएम यूनिवर्सिटी के उपकुलपति योगेश उपाध्याय, उद्भव के अध्यक्ष डॉ. केशव पांडेय और सचिव दीपक तोमर शामिल रहे।
स्वागत भाषण में डॉ. केशव पांडेय ने उद्भव के 30 वर्षों के सफर और अतिथियों का स्वागत किया। साथ ही, उद्भव के प्रयासों से ग्वालियर को मिले ‘म्यूजिक सिटी’ के दर्जे के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने अपने संबोधन की शुरुआत पद्मश्री नलिनी-कमलिनी की बात को दोहराते हुए की। उन्होंने कहा कि सैनिकों और कलाकारों, दोनों के जीवन में अनुशासन की प्रमुख भूमिका होती है, जो बेहतर तालमेल स्थापित करने में सहायक है। उद्भव उत्सव के 21वें वर्ष तक समर्पण और मेहनत के साथ पहुंचने पर उन्होंने आयोजकों की सराहना की और उम्मीद जताई कि आने वाले समय में उद्भव का स्वरूप और विस्तार दुनिया के हर कोने तक पहुंचेगा।
उन्होंने कहा कि कला की कोई भाषा नहीं होती। संगीत अपनी शैली से अर्थ व्यक्त करता है, तो नृत्य में चेहरे के हाव-भाव ही बहुत कुछ कह देते हैं। उन्होंने युवा कलाकारों को संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की सलाह दी और कहा कि मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन) जैसी पहल संवाद के जरिए मतभेदों को दूर करने और सहमति बनाने का सशक्त माध्यम बन रही हैं।
एडमिरल त्रिपाठी उद्भव के आग्रह पर 36 वर्षों बाद अपनी पत्नी शशि त्रिपाठी के साथ ग्वालियर आए। उन्होंने मियां तानसेन, ध्रुपद और ग्वालियर की समृद्ध संगीत विरासत का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक कूटनीति का सशक्त माध्यम हैं। भारतीय संस्कृति की ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देती है। ऐसे आयोजन विभिन्न देशों और संस्कृतियों के बीच आपसी समन्वय और समझ को मजबूत करते हैं।
उन्होंने मॉडल यूनाइटेड नेशंस (एमयूएन) में वैश्विक विषयों पर विद्यार्थियों की चर्चा को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इससे विद्यार्थियों में अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की समझ विकसित होती है। इस दौरान उन्होंने अपने 30 वर्षों के अनुभव भी साझा किए।
पद्मश्री नलिनी-कमलिनी ने कहा कि कलाकार और सैनिक, दोनों अनुशासन के प्रति समर्पित होते हैं। जिस तरह पत्थर को मूर्ति बनने के लिए चोट सहनी पड़ती है, उसी तरह कलाकार और सैनिक भी कठिन प्रशिक्षण और अनुशासन से निखरते हैं। गुरु अपने शिष्यों को तराशकर उनकी प्रतिभा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।
विभिन्न आयु वर्गों में प्रतिभागियों ने दिखाया हुनर
उद्भव उत्सव-2026 के एकल नृत्य वर्ग में 5 से 12 वर्ष आयु वर्ग के आठ, 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 12 और 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के पांच प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। सेमी-क्लासिकल श्रेणी में 5 से 12 वर्ष आयु वर्ग के पांच, 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 17 और 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के चार प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का संचालन समीक्षा दुबे और डॉ. मनीषा गिरी ने किया, जबकि प्रवीण शर्मा ने अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
निर्णायक मंडल में कोलकाता की प्रोफेसर देवजानी चटर्जी, श्रीमती अनु मिश्रा, वाणी माधव, बालकृष्ण मरार, धीरज कुमार पांडेय और लावण्या आप्टे शामिल रहे।

