सूनी खदानें, ठप बाजार और बढ़ता पलायन: दम तोड़ता जुन्नारदेव का रोजगार, दमुआ में सियासी दांव-पेच के बीच सुलग रहा स्टील प्लांट का मुद्दा | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश की बड़ी विधानसभा क्षेत्रों में शामिल और कभी समृद्ध कोयलांचल के रूप में पहचानी जाने वाली जुन्नारदेव नगरी आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। 97 ग्राम पंचायतों वाले इस विशाल क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की कमी ने स्थानीय युवाओं और परिवारों को पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है।

मुख्य समस्याएँ और क्षेत्र की स्थिति

कोयला खदानों का बंद होना: जुन्नारदेव क्षेत्र लंबे समय से कोयला खदानों पर आर्थिक रूप से निर्भर रहा है। खदानों के लगातार बंद होने से क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ा है और कोयला आधारित रोजगार के अवसर कम हुए हैं।

व्यापार पर गहरा असर: रोजगार के अवसर कम होने और खदानों के बंद होने का सीधा असर स्थानीय बाजारों पर पड़ा है। ग्राहकों की संख्या घटने से व्यापारियों के कारोबार पर असर पड़ रहा है और कई बाजारों में पहले जैसी रौनक नहीं रही।

मजबूरन पलायन: आजीविका के पर्याप्त साधनों की कमी के चलते क्षेत्र के युवा महानगरों और दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जाने को विवश हैं।

राजनीतिक बयानबाजी और स्टील प्लांट का मुद्दा

क्षेत्र में प्रमुख चर्चा दमुआ में प्रस्तावित स्टील प्लांट को लेकर बनी हुई है।

आरोप-प्रत्यारोप: स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि दमुआ में प्रस्तावित स्टील प्लांट राजनीतिक खींचतान के कारण आगे नहीं बढ़ सका। हालांकि, इस संबंध में अलग-अलग राजनीतिक पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं।

सत्ता और विपक्ष की भूमिका: एक ओर विपक्षी दल पर प्लांट को लेकर बाधा उत्पन्न करने के आरोप लगाए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठाया जाता है कि सत्ता में रहते हुए संबंधित स्तर पर प्लांट को शुरू कराने के लिए ठोस प्रयास क्यों नहीं किए गए। स्थानीय लोग अब राजनीतिक बयानबाजी के बजाय रोजगार और उद्योग से जुड़े ठोस समाधान की अपेक्षा कर रहे हैं।

समाधान और उम्मीद की किरण

नई खदानों की स्वीकृति: क्षेत्र में नई खदानों के शुरू होने या स्वीकृति मिलने की चर्चाओं से स्थानीय स्तर पर रोजगार को लेकर उम्मीद जगी है। यदि इन परियोजनाओं पर समयबद्ध तरीके से काम शुरू होता है, तो क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है।

नए उद्योग-धंधों की आवश्यकता: क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए शासन-प्रशासन को केवल कोयला आधारित रोजगार पर निर्भर रहने के बजाय लघु, मध्यम और बड़े उद्योगों की संभावनाओं पर भी काम करना होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

जुन्नारदेव की रोजगार संबंधी समस्या अब केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक भविष्य से जुड़ा विषय बन चुकी है। यदि समय रहते रोजगार के नए अवसर और औद्योगिक गतिविधियां विकसित नहीं की गईं, तो क्षेत्र से पलायन की समस्या और गंभीर हो सकती है।

By nit

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