अमीरों में नहीं गरीबों में होती है जाति : सुरेश द्वादशीवार | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

अमीरों में नहीं गरीबों में होती है जाति : सुरेश द्वादशीवार | New India Times

धर्म के नाम पर दुनिया मे हुए 14 हजार युद्ध में करोड़ों लोग मारे गए। कोई धर्म औरत को सम्मान और आज़ादी नहीं दे सकता। हमारे समाज में अमीरों की कोई जाति नहीं है जातियां तो केवल गरीबों में होती है। गांधी स्मारक निधी कोथरुड पुणे में कुमार सप्तर्षि के जन्म दिन पर भारत के संविधान समक्ष चुनौतीया इस विषय पर आयोजित व्याख्यान में पत्रकार सुरेश द्वादशीवार बोल रहे थे। सुरेश सर ने कहा किसी भी शब्दकोश में राष्ट्र शब्द नहीं है। राष्ट्र अलगाव की भावना पैदा करता है जब की देश शब्द में अपनापन है।

राशिया में मजदूरों ने नहीं हारे हुए सैनिकों ने क्रांति की लेनिन उनका नेता बना। राम मनोहर लोहिया ने कांग्रेस कार्य समिती की बैठक में भारत के बंटवारे के पक्ष में वोट दिया और बाहर जा कर बटवारे के लिए नेहरू को जिम्मेदार ठहराया। जॉर्ज फर्नांडिस अटल बिहारी की सरकार में मंत्री बने उनके कारण अटल जी को मजबूरन लाल कृष्ण अडवाणी को उप-प्रधानमंत्री बनाना पड़ा। संविधान सरकार के लिए बनाया गया कानून है सरकार को उसके दायरे में रहकर काम करना चाहिए। एक नेता 310 बार एपस्टीन के चकले में जा कर आया पर किसी अखबार ने ये छापा नहीं।

जस्टिस लोया के केस से संबंधित दो जज शीर्ष अदालत में चीफ़ जस्टिस बने। जिनको आज़ादी क्या है ये नहीं समझता वो इस देश में आज़ाद है। प्रत्येक व्यक्ति को उसकी बुद्धि के स्तर पर अवसर मिले इसी को न्याय कहते हैं। कम्युनिस्ट विचारक ग्रैमी के मुताबिक पूंजीपतियो ने समाज में एक ऐसा मध्यम वर्ग बनाया है जिसे ग़रीबो के शोषण से कोई लेना देना नहीं है। जन्म से जात धर्म देश मिलते हैं लेकिन मूल्य हमें इन सब के परे जाना सिखाते हैं। मंच पर उल्हास पवार , शिवाजीराव कदम , रमेश आढाव , अनवर राजन , तेजस भालेराव , प्रवीण सप्तर्षि मौजूद रहे निवेदन सूरज कुलकर्णी ने किया।

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