नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र के 9 करोड़ 50 लाख नागरिकों को कर्ज़ के बोझ तले दबाने वाली देवेन्द्र फडणवीस सरकार के मंत्रियों की पैसों की भूख कम नहीं हो रही है। केंद्र सरकार की नई आर्थिक नीति के अनुसार राज्य सरकारे अपने प्रदेश के बुनियादी विकास के लिए विश्व बैंक और उसके समकक्ष बैंकों से सीधा कर्ज़ ले सकते हैं। महाराष्ट्र के उपर 11 साल में 10 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ चढ़ चुका है। खाली तिज़ोरी केंद्र के पास गिरवी पड़ी है तो फडणवीस सरकार नए प्रोजेक्ट्स को BOT के अधीन निजी हाथों में सौंप रही है। राजमार्ग नं 19 कोठोरे दीगर सटाना मालेगांव पाचोरा पहुर वाकड़ी का निर्माण अब एशियन डेवलपमेंट बैंक से मिले 184.41.60.589 करोड़ रुपए के माध्यम से किया जा रहा है। वर्तमान समय मे 19 नंबर की ये डामरी सड़क पहुर से शेंदुर्णी 12 किमी तक अच्छी है।

आगे पाचोरा तक की 30 किमी सड़क को उखाड़कर फिर से डामरीकरण किया जा सकता है। लेकिन सरकार ने कांक्रीट सड़क बनाने के लिए बैंक से 184 करोड़ का क़र्ज़ लिया। एक और मजे कि बात मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में ग्रामीण क्षेत्रो की सड़कों को दर्जा उन्नति के नाम पर नेताओं के वफादार ठेकेदार घटिया मुरूम बिछाकर करोड़ों रुपए के बिल निकाल रहे हैं। बात बिल्कुल साफ़ है राज्य के खजाने में कुछ बचा नहीं तो अब केंद्र और केंद्र से मिली छूट का लाभ उठाकर वैश्विक बैंकों से विकास के नाम पर कर्जा लेकर सत्ता पक्ष के लोग कमीशन के पैसे से प्रॉपर्टियां बना रहे हैं। आप महाराष्ट्र में किसी भी विधानसभा क्षेत्र में चले जाइए PWD ग्राम विकास पर्यटन विभाग के कामो में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार देखने को मिलेगा। अगली रिपोर्ट में हम आपको नेतागिरी ठेकेदारी की क्रोनिलॉजी के बारे में जानकारी देने का प्रयास करेंगे।

