मुकुंदपुर भूमि घोटाला: मंत्रालय व आयुक्त आदेश की अवहेलना, एसडीएम पर पक्षपात के आरोप | New India Times

मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:

मुकुंदपुर भूमि घोटाला: मंत्रालय व आयुक्त आदेश की अवहेलना, एसडीएम पर पक्षपात के आरोप | New India Times

जहां एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव एससी-एसटी वर्ग के लिए मध्यप्रदेश शासन आवास योजना की भूमि को संरक्षित कर एससी-एसटी वर्ग के साथ भूमिहीनों को भूखंड आवंटित करने का एलान और फरमान जारी कर रहे हैं वहीं इस एलान और फरमान को नस्तनाबूद किया जा रहा है इसका जीता-जागता ज्वलंत उदाहरण मैहर जिले के अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मुकुन्दपुर में देखा जा सकता है। ज्ञात हो कि मुकुन्दपुर में जूं सेंटर के समीप शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुकुन्दपुर संकुल केन्द्र के ठीक सामने लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये की वेशकीमती भूमि मध्यप्रदेश शासन आवास योजना की भूमि आराजी नंबर 113 और आराजी नंबर 117 दोनों आराजियों का कुल रकबा 1एकड़ 71 ढ़िसमिल है। जिसे बीरेंद्र शुक्ला के द्वारा हड़पकर आनन फानन कर अपने नाम करा लिया गया था जिसकी शिकायत विधानसभा पटल तक की गई थी।

तब उक्त आराजियों को विधानसभा पटल द्वारा संज्ञान लिया गया और आदेश जारी किया गया जिसे आयुक्त रीवा के द्वारा आदेश देकर मध्यप्रदेश शासन आवास योजना दर्ज कर भोपाल मंत्रालय को और आयुक्त रीवा को जानकारी भेजी गई कि उक्त आराजियों को पुनः मध्यप्रदेश शासन आवास योजना दर्ज कर दी गई है। किन्तु राजस्व रिकार्ड के अभिलेख में मध्यप्रदेश शासन आवास योजना दर्ज नहीं की जिसके पालन हेतु  ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों के द्वारा नायब तहसीलदार ताला को दी गई जिसे नायब तहसीलदार ने संज्ञान में अनावेदक बीरेंद्र शुक्ला को तलब करते हुए 11 नवम्बर 22 को पुनः मध्यप्रदेश शासन आवास योजना दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया गया और हल्का पटवारी ने राजस्व रिकार्ड में दर्ज अभिलेख कर दिया। तब इस आदेश की अपील एसडीएम अमरपाटन पीठासीन अधिकारी के.के,. पाण्डेय के पास की गई।

तब के श्री पाण्डेय के द्वारा गुप-चुप तरीके से शिकायत कर्ताओं को बगैर सूचित किये, मंत्रालय भोपाल और आयुक्त रीवा के आदेश को दरकिनार करते हुए श्री पाण्डेय ने दिनांक 27 अक्टूबर 22 को पुनः बीरेंद्र शुक्ला के नाम दर्ज करने का आदेश दिया गया। अब सोचनीय बात तो यह है कि भोपाल मंत्रालय और आयुक्त रीवा के आदेश को एसडीएम अमरपाटन पीठासीन अधिकारी के.के.पाण्डेय क्या दरकिनार कर सकते हैं। जबकि भोपाल मंत्रालय से आदेश जारी है कि मध्यप्रदेश शासन आवास योजना दर्ज भूमि को बगैर मंत्रालय के आदेश नवइयत परिवर्तन करने का अधिकार कलेक्टर को नहीं है और यहां एक एसडीएम ने ही यह आदेश को ध्यान नहीं दिया। वहीं मंत्रालय भोपाल और आयुक्त रीवा का आदेश भी श्री पाण्डेय के सामने नदारद हैं श्री पाण्डेय ने भोपाल मंत्रालय को और आयुक्त रीवा की अव्हेलना की है। जिसकी शिकायत जगह-जगह ग्रामीण जनों ने की है।जन आवाज में चर्चा है कि एक भाजपाई का कद्दावर नेता के कारण उक्त आदेश एसडीएम ने दिया है।

तो क्या उस कद्दावर नेता को एससी-एसटी और भूमिहीनों का गला रेतकर एक सम्पन्न व्यक्ति के पक्ष में काम करना चहिए।अब इस मामले में देखना यह है कि उक्त मामले को प्रशासन कितना मुस्तैदी से जांच करती है। और वहीं दूसरी ओर एक जनप्रतिनिधि से सरस्वती हाई स्कूल मुकुंन्दपुर हेतु अतिरिक्त भवन हेतु आयी राशि को खुद डकार लिया गया है। और अतिरिक्त भवन नहीं बनवाया गया है। वहीं तीसरी ओर भाजपा और बजरंग दल का चोला ओढ़ कर अपने बेटे विनिवेश शुक्ला के नाम अनैतिक रूप से सरस्वती हाई स्कूल मुकुन्दपुर से अनुभव प्रमाण पत्र तैयार कर डी.ईएल.ईडी. करा लिया गया है। जबकि विनितेश ने कभी सरस्वती हाई स्कूल मुकुन्दपुर में गया ही नहीं जो नि: शुल्क शिक्षा प्रदान किये उनको अनुभव प्रमाण पत्र नहीं दिया गया। जिसकी शिकायत प्रदेशिक सचिव सरस्वती शिक्षा परिषद महाकौशल जबलपुर और सीएमहेल्प लाइन से भी की गई है। किन्तु अभी तक कार्यवाही न होने से उक्त व्यक्ति का मनोबल बढ़ता जा रहा है।

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