सड़क से नपेगी ग्राम पंचायतें: कहां गया बुनियादी सेवाओं का 3000 करोड़ रुपया ? | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

सड़क से नपेगी ग्राम पंचायतें: कहां गया बुनियादी सेवाओं का 3000 करोड़ रुपया ? | New India Times

जिला परिषद, महानगर पालिका ग्राम पंचायत राज्य सूची में सत्ता के विकेंद्रीकरण के यह तीन मुख्य संवैधानिक सिस्टम है। मंत्री गिरीश महाजन के पुलिस (ग्रीक भाषा में पुलिस का मतलब शहर होता है) ने आसपास की पांच ग्राम पंचायतों को अपने भीतर समाहित करने का डंडा दिखाया है। नगर परिषद के प्रशासक ने ग्राम पंचायतों को क्षेत्र विस्तार की नोटिस भेज दी है। टेस्ट ट्यूब गोदी चैनल की राजनीतिक रिपोर्टिंग से “टैक्स” शब्द गायब  है। वाकी बुद्रुक , वाकी खुर्द , शिंगाइत , पलासखेड़ा गुजराचे , टाकली बुद्रुक इन पांच गांवों की करीब पंधरा हजार आबादी नगर परिषद के महंगे टैक्स सिस्टम के चपेट में आने के सख़्त विरोध में है। विकास की आड़ लेकर विस्तार की शक्ल में कोई हिसाब इतिहास की किताब के पन्ने को काली स्याही से भरना चाहता है।

सड़क से नपेगी ग्राम पंचायतें: कहां गया बुनियादी सेवाओं का 3000 करोड़ रुपया ? | New India Times

तीस साल से आज तक ब्लॉक के हर एक गांव के समेत जामनेर सिटी की सड़के और पेयजल योजनाओं के निर्माण पर सरकारी तिज़ोरी से 3000 करोड़ रुपए से अधिक पैसा खर्च किया जा चुका है। बावजूद तालुका बारामती के इर्द गिर्द भी क्यो ? खड़ा नहीं है। जामनेर नगर परिषद ने 2002 के बाद से अपने वर्तमान अधिकार क्षेत्र में एक भी ठोस काम नही किया। शहर में नगर परिषद का अपना स्कूल , अस्पताल , पुस्तकालय स्टेडियम , ऑडिटोरियम , बागीचे , कचरा निर्मूलन केंद्र , मुफ़्त WiFi , बाय पास रोड , मुख्य सड़क पर पेशाबघर , सुलभ शौचालय , आवारा पशु संगोपन केंद्र नही है। PWD द्वारा निर्मित फोरलेन की ऊपरी परत दिखाकर ग्राम पंचायतों को नापने का सरकार का प्रयास है। ग्राम सभा के बाद संभावित पीड़ित गांव अदालती लड़ाई लड़ने की दिशा में कदम उठाने के विकल्प पर सोच रहे हैं।

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