नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आज़ाद हिंद फ़ौज के प्रणेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जन्म तिथि पर भारत के अंडमान और निकोबार टापू पर श्री विजय पुरम में एक पदयात्रा निकाली गई। मोदी सरकार की मंत्री रक्षा खडसे ने यात्रा मे शामिल हो कर राष्ट्र सेवा योजना और माई भारत वॉलेंटियर के सदस्यो के साथ कदम मिलाए। इसके अलावा खडसे ने भारत क्रीड़ा प्राधिकरण केंद्र पहुंचकर खेल सुविधाओ की जानकारी ली और खिलाड़ियो से बातचीत किशधझ इसके बाद खडसे ने सेल्युलर जेल जा कर उस सेल को सलाम किया जहां स्वतंत्रता सेनानी विनायक सावरकर को कैदी बनाकर रखा गया था।

भारत सरकार कि ओर से सरकारी स्तर पर नेताजी की जयंती को बड़े पैमाने पर मनाया जा रहा है लेकिन सत्तापक्ष की प्रमुख पार्टी के तौर पर बीजेपी ने संगठन के भीतर नेताजी को याद करना कुछ जरूरी नही समझा है।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन मे अंग्रेजो से लोहा लेने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ़ौज खड़ी करने वाले सुभाष बाबू पहले क्रांतिकारी थे। और नेताजी की इसी आजाद हिंद फ़ौज झंके खिलाफ़ अंग्रेजो को समानांतर बल मुहैया कराने वालो का भी एक इतिहास है ! नेताजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे ! रूढ़िवादी विचारो के प्रमुख कहलाते कुछ महाज्ञानी लोग देश की आज़ादी को लेकर जानबूझकर धार्मिक प्रतिको को तरजीह दे कर स्वतंत्रता संग्राम के उस महान इतिहास को मिटाने का प्रयास कर रहे है जिस इतिहास को बनाने मे उनका कभी कोई योगदान नही रहा ! दुनियाभर के लेखको ने सुभाष बाबू पर करीब 25 हजार से अधिक किताबें लिखी है।

