मोहम्मद सिराज, ब्यूरो चीफ, पांढुर्णा (मप्र), NIT:

कलेक्टर श्री अजयदेव शर्मा और बीईओ युवराज वानोडे के निर्देशन में प्राचार्य शीला सांबारे ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए एक अनूठी पहल की। उनके प्रयासों से स्कूल परिसर अब “आनंद धाम शांति वन” में परिवर्तित हो गया है। स्कूल शांतिपूर्ण वातावरण में स्थित है, चारों ओर हरियाली, खेत-खलिहान और पेड़ों से घिरा यह स्थान बच्चों के लिए अनुकूल बन गया है। अब बच्चे नियमित रूप से स्कूल आते हैं, पढ़ाई करते हैं और तंबाकू, गुटखा जैसी नशीली चीज़ों का सेवन नहीं करते।
ग्रामों में जाकर की पहल
सितंबर 2024 में नव नियुक्त प्राचार्य शीला सांबारे ने बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाने के लिए कई प्रयास किए। स्कूल और आसपास के परिसर की सफाई की गई, शाला प्रांगण से पत्थरों और झाड़ियों को हटाया गया, नालियों की सफाई कराई गई और फेंसिंग को सुधारा गया।
उन्होंने नीलकंठ, धावड़ीखापा, खड़की, परसोडी, खेडीधानभोयर और सावरगांव जैसे गांवों में जाकर अभिभावकों को शिक्षा का महत्व समझाया साथ ही बच्चों को स्कूल भेजने और तंबाकू-गुटखा जैसे नशों से दूर रहने की समझाइश दी। उन्होंने शाम 6 बजे से रात 9:30 बजे तक बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा उठाया। निर्धन बच्चों को भीमराव भादे द्वारा दी गई एलईडी लाइट्स वितरित की गईं।
सामाजिक सहयोग
इस पहल में पार्षद सुरेश सुरजुसे, प्रदीप जुननकर, और चंदा देशभ्रतार, साथ ही नगर पालिका पांढुरना, पवन जुनेजा का सहयोग मिला। पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कलेश ने जन संवाद कार्यक्रम के तहत बच्चों को देश सेवा, अनुशासन, नशा मुक्त भारत और शिक्षा का महत्व बताया। उन्होंने गरीब स्कूल को गोद लिया।
छात्रों और अभिभावकों का सम्मान
अच्छे अंक प्राप्त करने, नियमित स्कूल आने और परिसर की सफाई में योगदान देने वाले छात्रों और उनके माता-पिता को सम्मानित किया गया। इससे छात्रों और अभिभावकों में स्कूल के प्रति समर्पण की भावना विकसित हुई। लाइब्रेरी, प्रयोगशाला, शैक्षणिक चार्ट और ऑडियो-वीडियो सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे बच्चों की शिक्षा मनोरंजक बन रही है और परीक्षा परिणामों में सुधार हो रहा है।
स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम
स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्राचार्या शीला सांबारे ने नगर पालिका पांढुरना की टीम के साथ मिलकर वार्डों में सफाई अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने “मेरा कचरा मेरी जिम्मेदारी” का संदेश देते हुए लोगों को स्वच्छता, स्वास्थ्य, और शिक्षा का महत्व समझाया।
मेरा स्कूल – स्मार्ट स्कूल का लक्ष्य
आदिवासी अंचल की इस शाला में जहां 85% बच्चे गरीबी रेखा के नीचे और 51% छात्र अनुसूचित जनजाति से हैं, वहां बच्चों को 4 से 9 किमी की दूरी तय कर साइकिल या पैदल आना पड़ता है। प्राचार्य ने सरकारी योजनाओं और दानदाताओं की मदद से स्कूल को स्मार्ट बनाने का लक्ष्य रखा है।
स्कूल में सीसीटीवी कैमरे, कंप्यूटर, डिजिटल बोर्ड, इंटरनेट, और आउटडोर फिटनेस संरचनाओं जैसे आधुनिक उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, सरकारी स्कूल में प्राइवेट स्कूल जैसी सुविधाओं के साथ हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं खोलने का भी उद्देश्य है।

