नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मुझे शिवाजी महाराज पर लिखी तर्क संगत किताबे चाहिए। सॉरी सर हमारे पास ऐसी किताबे नहीं है पुणे फर्गुसन कॉलेज में पुस्तक मेला लगा है आप वहां जाइए। इंद्रायणी घाट पर संत ज्ञानेश्वर समाधी स्थल के आसपास सजे मार्केट की हजारो दुकानों में 50% दुकानें किताबों की है। मांग के बदले शॉप कीपर्स का जवाब आप पढ़ चुके है। श्रीमद् भगवत गीता रामायण महाभारत हिन्दू पंचांग ज्ञानेश्वरी जैसे आध्यात्मिक ग्रंथ आसानी से मिल जाते है। कबीर पंथी और समतावादी विचार, वैज्ञानिक चेतना को बल देने वाले साहित्य कृति दुर्लभ है। आलंदी में एक भी बड़ा ग्रंथालय नहीं है प्रत्येक जाति समाज की धर्मशाला अवश्य है।

मैरेज ब्यूरो के दफ़्तरों में हर रोज़ सैकड़ों विवाह हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत कानूनी रूप से दर्ज होते हैं। शहर की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी मैरेज हब पर निर्भर है। समाजवादी संत ज्ञानेश्वर के विचारो से प्रेरित राज्य कि पीढ़ी के लिए पुरोगामी आधुनिकता को आचरण में लाने के प्रयासों को सदियों से रूढ़िवादियों की ओर से नियंत्रित किया जा रहा है। New India Time’s ने अपनी पहली कुछ रिपोर्ट्स मे आलंदी के खोखला बुनियादी विकास की सच्चाई पेश करी है। इस क्षेत्र में हमेशा से NCP जैसी क्षत्रप पार्टियों का दबदबा रहा है बावजूद बहुजनों की सांस्कृतिक धरोहरों का समग्र विकास नहीं किया गया।

मनोरंजन की चाह रखने वाले दर्शकों को सिनेमा हॉल नाटक थिएटर के लिए सीधे पुणे की ओर कूच करना पड़ती है। गांव में मांसाहार पूर्ण रूप से वर्जित है पर चाकण में आते हि सब कुछ आसानी से मिल जाता है। पंढरपुर देहु आलंदी के व्यापक विकास के लिए बड़ी परियोजना की आवश्यकता है। महाराष्ट्र में पॉलिटिकल प्लेटफॉर्म पर दो भिन्न विचारधाराओं की लड़ाई लड़ी जा रही है। वर्तमान सरकार में शामिल तीनों दलों की बेमेल सोच ने सत्ता की अनैतिक भूख को रेखांकित किया है।

