नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

इंद्रायणी भीमा नाम दो अलग अलग नाम से पहचानी जाती है इस एक नदी ने महाराष्ट्र के समाजवादी संतों से लेकर छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज का महान पुरोगामी इतिहास को अपनी आंखों से देखा है। New India Time’s ने संत ज्ञानेश्वर के आलंदी तीर्थ क्षेत्र पर पेश करी पिछली रिपोर्ट में इंद्रायणी के गटर में बदलने की सच्चाई से रूबरू करवाया था। आलंदी को देहु पंढरपुर के चलते भागवत धर्म की वारी परंपरा मे जो सांस्कृतिक महत्व है वह अनन्य साधारण है।

किसी जमाने में इंद्रायणी पर बना आलंदी से पुणे जोड़ने वाला संकरा पुल आज आखिरी सांसे गिन रहा है। ठीक सामने घाट और मंदिर को कनेक्ट करता 2004 मे बना ब्रिज आषाढी एकादशी को जुटने वाली भीड़ के लिए नाकाफी साबित होता है। उस समय उजनी डैम से पानी छोड़ कर प्रशासन नदी की गंदगी को साफ़ कर अपना पाप धो लेता है।

महाराष्ट्र में कृष्णा गोदावरी भीमा प्रवरा नदियों पर बसे तीर्थ मां गंगा की तरह अपने किसी भी बेटे को नहीं बुलाते हैं। कुछ निकम्में चमकू स्टंट के लिए बाढ़ में उतरकर गोदी मीडिया के कैमरे जरूर खरीद लेते हैं। आलंदी में सौ से अधिक जर्जर इमारतें बड़े हादसे का इंतजार कर रही है। शेष दुर्दशा को आप फोटोज से अवलोकन कर सकते हैं।

BJS में नियुक्तियां: भारतीय जैन संगठन ने जलगांव ग्रामीण महिला जिला अध्यक्ष के लिए सोनल कोठारी और जिला ग्रामीण सचिव पद पर संगीता मंडलेचा का चयन किया है। केतन शाह प्रवीण पारख, विनय पारख, अशोक श्री श्रीमाल, चंद्रकांत डागा, सुमित मनोत ने मान्यवर देवियों का अभिनन्दन किया है।

