जिस कार में मिला 54 kg 40 करोड़ का सोना और 9.83 करोड़ कैश, वह चेतन उर्फ चंदन ड्राइवर के नाम… यही है आरोपी सौरभ का सबसे बड़ा राज़दार | New India Times

हिमांशु सक्सेना, ग्वालियर (मप्र), NIT:

जिस कार में मिला 54 kg 40 करोड़ का सोना और 9.83 करोड़ कैश, वह चेतन उर्फ चंदन ड्राइवर के नाम… यही है आरोपी सौरभ का सबसे बड़ा राज़दार | New India Times

भोपाल में मेंडोरी गांव में जो एसयूवी गाड़ी 54 किलो सोने और 9 करोड़ 82 लाख रुपए के साथ पकड़ी गई है, वह सौरभ शर्मा के करीबी चेतन सिंह गौर उर्फ चंदन के नाम पर रजिस्टर्ड है। चेतन सिंह गौर, सौरभ शर्मा के परिवार से शुरू से जुड़ा हुआ है, जिसने ड्राइवर के रूप में काम करना शुरू किया। इसके बाद ड्राइवर से सौरभ का राजदार बन गया और काम भी संभालने लगा। सौरभ शर्मा के नाम पर पूरे काम एक तरह से चेतन सिंह ही करने लगा था। परिवहन विभाग से लेकर कारोबार में चेतन सिंह ने जिम्मेदारी संभाल रखी थी। ग्वालियर के आरटीओ नंबर से रजिस्टर्ड, जो इनोवा क्रिस्टा एसयूवी मिली है, वह सौरभ उपयोग करता था। इसी एसयूवी से पहले सौरभ के परिवार को चेतन भोपाल लाता – ले जाता रहा है। चेतन सिंह ग्वालियर में लश्कर के लक्कड़खाना पुल पर रहता था।

जिस कार में मिला 54 kg 40 करोड़ का सोना और 9.83 करोड़ कैश, वह चेतन उर्फ चंदन ड्राइवर के नाम… यही है आरोपी सौरभ का सबसे बड़ा राज़दार | New India Times

आयकर और लोकायुक्त ने मारा था सौरभ शर्मा के यहां छापा

बता दें कि ग्वालियर के रहने वाले पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के भोपाल स्थित निवास व कार्यालय पर लोकायुक्त व आयकर की संयुक्त टीम ने छापेमारी की है। इसमें लगभग तीन करोड़ नकद बरामद किए गए थे। इसके बाद रात में ही खबर मिली कि भोपाल के मेंडोरी गांव में एक इनोवा गाड़ी लावारिस खड़ी है। वहां आयकर की टीम पहुंची तो आंखे फटी रह गईं। यहां सोना व नकदी गाड़ी में भरा पड़ा मिला। यह कार चेतन सिंह के नाम पर रजिस्टर्ड होने के बाद यह पक्का हो गया कि सौरभ शर्मा का करीबी चेतन ही यह कार लेकर माल को छिपाने के लिए ले जा रहा होगा।

चेतन सिंह उर्फ चंदन: छह साल पहले ग्वालियर से चला गया परिवार

साैरभ शर्मा का करीबी चेतन सिंह का ग्वालियर में मकान बताया गया है, लेकिन परिवार नहीं रहता है। आसपास के लाेगों के अनुसार लभगभ छह साल पहले से परिवार यहां नहीं रह रहा है।
चेतन सिंह गौर के पिता का नाम प्रताप सिंह गौर है। सौरभ ही नहीं यह पूरे परिवार का खास बन गया था। सौरभ जहां नहीं पहुंच पाता था, वहां पूरा काम चेतन सिंह ही देखता था।

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