नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2014-2019 , 2022-2024 इन आठ सालों में महाराष्ट्र और 2014 से 2024 इन दस सालों में केंद्र में भाजपा की साफ़ बहुमत वाली सरकार है। सिंचाई के नाम पर महाराष्ट्र को कोई नया प्रोजेक्ट नहीं मिला। पुराने प्रोजेक्ट्स को सुधार पुनःमान्यता (सुप्रमा) देने के नाम पर सरकारी खजाने से सैकड़ों करोड़ रुपया डीपीआर पर हि खर्च कर दिया गया। यू ट्यूब के तहखाने में जाकर झांकने पर तत्कालीन मंत्रियों के बयान सुनने के बाद नार-पार का आज का सच सफेद झूठ मालूम पड़ने लगता है। मोदी जी की सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से महाराष्ट्र को 40 हजार करोड़ रुपया दिया है। ये पैसा कहा गया? नितिन गडकरी जलशक्ति मंत्री थे वो नार – पार नदी जोड़ योजना के लिए 20 हजार करोड़ रुपया देने वाले थे उसका क्या हुआ? वर्तमान में नार पार के लिए किया गया 7 हजार 500 करोड़ के निर्धारण कैसे किया? जाएगाघोषणा के बाद तमाम सवाल प्रचाअर में दबा दिए गए हैं। ज्ञात हो कि फडणवीस सरकार ने गिरणा नदी पर बलून बांध डालने के लिए रतन टाटा से आर्थिक सहायता मांगी थी। देवेन्द्र फडणवीस सरकार के कार्यकाल में सूबे में एक नया डैम नहीं बना। नार-पार, दमनगंगा, पिंजाल, देव, अंबिका यह सब पश्चिम दिशा की ओर बहने वाली नदियों के पानी की उपलब्धता को लेकर अलग अलग राय है। इस प्रोजेक्ट को 2016 में लिफ्ट इरिगेशन के तौर पर मान्यता मिली फिर SlTAC ने 2023 में नार पार को मंजूरी दे दी। पिछली रिपोर्ट में हमने बताया कि इस योजना में पश्चिम दिशा में बहने वाली नदियों के धारा प्रवाह को उत्तर दिशा में मोड़ना शामिल है। नासिक धूलिया जलगांव के 40 विधानसभा सीटों को ध्यान में रखकर नार पार के सपने को आकर दिया गया है। इसके साथ आने वाले दिनो मे मेगा रिचार्ज नाम का एक काफ़ी बड़ा प्रोजेक्ट चर्चा के केंद्र मे लाया जाएगा। वाघुर डैम का 2500 करोड़ का लिफ्ट इरिगेशन प्लान 2011 से लंबित पड़ा है जिससे जामनेर ब्लॉक के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलना था।
15 पटवारीयों का प्रशिक्षण: राजस्व विभाग द्वि सप्ताह तहत प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया।15 नए पटवारियों को राजस्व संहिता खंड 4, टैक्स वसूली की कानूनी प्रक्रिया, सेवा कर्तव्य कर्मठता नियमों के विषय में अवगत कराया गया।

