रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

खेती किसानी के क्षेत्र में किसान समुदाय की आत्म निर्भरता को बढ़ाने और आय वृद्धि के सम्बन्ध में ज़िला कलेक्टर सुश्री तन्वी हुड्डा द्वारा नियमित रूप से साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित की जा रही है।
समीक्षा के दौरान जिले के कृषिगत क्षेत्रों में उपलब्ध अवसर और संभावनाओं को एकीकृत स्वरूप में क्रियान्वित करने की कार्य योजना निर्धारण के साथ-साथ इस दिशा में चरणबद्ध कार्यान्वयन पर लगातार ज़ोर दिया जा रहा है। कलेक्टर द्वारा विगत बैठक में ग्रामीण सरोकारों से संबधित समस्त विभागों को समस्त विकासखण्डों में किसानों और ग्रामीणजनों की संगोष्ठीयां आयोजित करने के निर्देश दिये गये। इसी कड़ी में झाबुआ विकासखण्ड की संगोष्ठी कृषि विज्ञान केन्द्र परिसर में आयोजित की गई।
झाबुआ जिले में बेहतर खेती किसानी के लिये अनुकूल जलवायु के साथ-साथ पर्याप्त प्राकृतिक, मानव संसाधन उपलब्ध है। झाबुआ जिले में फसलों की विविधता भी पर्याप्त है। किसान परम्परागत रूप से खेती किसानी की बारिक समझ रखते है। बदलते हुऐ मौसमीय परिवेश में किसानों को कम पानी मांग वाली नवीनतम किस्मों का चयन करना चाहिऐ। ग्रामीण विकास विभाग, आजिविका परियोजना द्वारा खेती में अधोसंरचनागत विकास और क्षमतावर्धन के लिये संचालित कार्यक्रम का किसानो को आगे आकर लाभ प्राप्त करना चाहिए। कृषि विभाग द्वारा झाबुआ विकासखण्ड के कृषकों की आयोजित कृषक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि के रूप में उद्गार व्यक्त करते हुऐ जिला पंचायत के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश वर्मा ने संबोधित किया। उपस्थित कृषकों विशेषकर महिला कृषकों को आजिविका परियोजना के कल्याणकारी कार्यक्रमों से बेहतर ढंग से जुड़कर लाभ लेने के लिये प्रेरित किया।
जिले के उप संचालक कृषि एन.एस.रावत द्वारा किसान समुदाय से आव्हान करते हुऐ बताया कि कृषकों को आजिविका उन्नयन के लिये खेती की लागत को नियंत्रित करते हुऐ उद्यानिकी, पशुपालन, मछली पालन जैसे उद्यम भी अपनाये जाने चाहिऐ। उप संचालक कृषि एन.एस.रावत ने किसानों को संबोधित करते हुऐ कहा कि घातक रसायनों पर पराधिनता को समाप्त करते हुऐ प्राकृतिक कृषि की विधाओं को लागू कर गुणवत्तायुक्त उत्पादन के साथ-साथ आय में भी वृद्धि की जा सकती है। मिलेट्स फसलों और प्राकृतिक उपज की बढ़ती हुई मांग को ध्यान में रखते हुऐ जिले के किसानों को अपनी खेती की योजना में समुचित परिवर्तन करने की आवश्यकता है।
कृषि विज्ञान केन्द्र के सभागार में बड़ी संख्या में उपस्थित महिला-पुरूष किसानों को जिले के प्राकृतिक खेती मास्टर ट्रेनर श्री बलवंत मावी ने प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं के बारे में किसानो को व्यावहारिक समझाईश दी गई। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख और वैज्ञानिक डॉ. जगदीश मोर्य ने खरीफ की फसलों के प्रबंधन के साथ-साथ रबी मौसम की कार्ययोजना बनाये जाने के लिये तकनीकी बारिकीयों से किसानों को सुपरिचित कराया। वैज्ञानिक डॉ. आर.के.त्रिपाठी ने भी किसानों का मार्गदर्शन किया। गोष्ठी के दौरान महिला कृषक मंजू सोमला, मिथूडी रामला, शान्तु मेसु ने अपने खेतो पर अपनाई जा रही मिलेट फसलों के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के लाभ और उत्साहजनक परीणामों के अनुभव किसानों के साथ साझा किया।
पशुपालन विभाग के डॉ. अमित दोहरे ने पशुपालन की विभिन्न समन्वित जानकारी देते हुऐ कडकनाथ मुर्गीपालन के विभिन्न बिन्दूओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उद्यानिकी विभाग के एस.आर.चौहान ने प्रचलित उद्यानिकी फसलों के साथ-साथ मसाला और औषधी फसलों की खेती प्रसंस्करण और विपणन की समझाईष किसानो को दी गई। अंजना रावत द्वारा ग्रामीण विकास विभाग अन्तर्गत संचालित किसान उन्मुखी योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालन गोपाल मुलेवा तकनीकी सहायक द्वारा बखूबी किया गया। कृषकों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुऐ सहायक संचालक कृषि एस.एस.मोर्य ने मिलेट्स की खेती आधारित कृषक परिचर्चा की सूत्रधारिता की। कृषक संगोष्ठी के अंतिम चरण में उप परियोजना संचालक आत्मा श्री एम.एस.धार्वे ने आभार प्रदर्शन किया।
