मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

परामर्श केन्द्र में पति द्वारा बताया गया की पत्नी बिना बताए चाहे जब मायके चली जाती है जिससे परिवार विशेष रुप से बच्चे जोकि 12 एवं 8 वर्ष के हैं प्रभावित हो रहे हैं अतः पत्नी को बुलाकर समझाया जाए जिस पर पत्नी को एवं पति को बुलाकर सद्भाव पूर्वक जीवन निर्वाह करने की समझाइश प्रदान की गई तथा दोनों को साथ में बिठाकर बात कराई गई. पत्नी द्वारा शिकायत की गई की मायके में तबीयत खराब होने के कारण उसे जाना पड़ा था इसलिए वह बिना बताए चली गई थी, पति द्वारा कहा गया कि अगर यह बता देती तो मैं स्वयं इसे पहुंचा देता। जाने के बाद बुलाने के बाद भी यह समय पर वापस नहीं आई अतः मुझे परामर्श केंद्र की शरण लेनी पड़ी. काउंसलर द्वारा दोनों को समझाइश प्रदान की गई जिस पर दोनों ने भविष्य में एक दूसरे को सहयोग प्रदान करने का वचन दिया और भविष्य में विवाद नहीं करने पर सहमति जताई अंततः परिवार टूटने से बच गया। इसी प्रकार एक अन्य प्रकरण में विवाह के बाद मात्र 8-10 दिन साथ निर्वाह करने के बाद ही दोनों को बीच वैवाहिक संबंधों में तनाव आ जाने के कारण पत्नी मायके जाने के बाद वापस नहीं आई तो पति द्वारा परामर्श केन्द्र में आवेदन देने पर पत्नी को बुलाकर समझाया गया किंतु वह अपने वैवाहिक जीवन से संतुष्ट नहीं होने के कारण संबंध तोड़ने पर अड़ गई जिस पर दोनों की सहमति से अलग होने के लिए न्यायालय से निराकरण की सलाह के साथ प्रकरण नस्ती बद्ध किया गया। ऐसे दो अन्य प्रकरणों में भी समझौते की संभावना प्रतीत नहीं होने पर पक्षकारों को न्यायालय की शरण लेने की सलाह देते हुए प्रकरण निराकृत किए गए।
अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के के अवस्थी के मार्गदर्शन में अधिवक्ता प्रदीप कुमार शर्मा सहित आहुति शर्मा और प्रीति श्रीवास्तव ने उक्त मामलों के अतिरिक्त आठ प्रकरणों की भी सुनवाई का पक्षकारों को सद्भाव पूर्वक जीवन निर्वाह की समझाइश प्रदान कर वार्तालाप करने व विचार विमर्श करने के लिए समय प्रदान किया।
