मौत की मशीनें: बिना विशेषज्ञ चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र, स्टिंग ऑपरेशन में बड़ा खुलासा | New India TimesOplus_131072

गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

मौत की मशीनें: बिना विशेषज्ञ चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र, स्टिंग ऑपरेशन में बड़ा खुलासा | New India Times

जिले में संचालित अधिकांश अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर अवैध डायग्नोस्टिक सेंटर बिना विशेषज्ञों के ही संचालित हो रहे हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ रही है।
‘न्यूज9 एक्सप्रेस’ के विशेष स्टिंग ऑपरेशन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कई अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर बिना किसी योग्य रेडियोलॉजिस्ट (MBBS/MD) के ही जांच की जा रही है। प्रशिक्षित डॉक्टरों की अनुपस्थिति में अप्रशिक्षित कर्मचारी मशीनें चला रहे हैं और फर्जी या गलत रिपोर्ट तैयार कर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
धरातल पर हकीकत उजागर

मौत की मशीनें: बिना विशेषज्ञ चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र, स्टिंग ऑपरेशन में बड़ा खुलासा | New India Times

टीम ने जब मरीज बनकर जलालपुर क्षेत्र के कई केंद्रों का दौरा किया, तो स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। नियमों के अनुसार हर अल्ट्रासाउंड केंद्र पर पंजीकृत रेडियोलॉजिस्ट की मौजूदगी अनिवार्य है, लेकिन स्टिंग में सामने आया कि साधारण कर्मचारी ही जांच कर रहे हैं।
अवध अल्ट्रासाउंड और शुक्ला अल्ट्रासाउंड सेंटर जैसे स्थानों पर न तो डॉक्टर की डिग्री उपलब्ध मिली और न ही वैध पंजीकरण के दस्तावेज।
गलत रिपोर्ट से बढ़ रहा खतरा
बिना विशेषज्ञ जांच के कारण गलत डायग्नोसिस के मामले भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में एक मरीज को जलालपुर के दो केंद्रों ने गलत रिपोर्ट दी, जबकि तीसरी जांच में किडनी में पथरी (स्टोन) का सही कारण सामने आया। ऐसी लापरवाही मरीजों के इलाज को गलत दिशा में धकेल सकती है।
ग्रामीणों को बनाया जा रहा निशाना
शहर के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में सक्रिय ये अवैध केंद्र भोले-भाले लोगों को कम पैसों का लालच देकर आकर्षित कर रहे हैं। उन्हें ऐसी रिपोर्ट दी जा रही है जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं होती।
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल
यह पूरा गोरखधंधा स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे लंबे समय से संचालित हो रहा है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अधिकारियों का रुख
स्टिंग ऑपरेशन के साक्ष्य जुटाने के बाद जब मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय शैवाल से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनका फोन संपर्क से बाहर मिला।

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